वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Globalization and the Indian Economy
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परिचय
वैश्वीकरण की पृष्ठभूमि
आज के विश्व में, उपभोक्ता के रूप में हमारे सामने वस्तुओं और सेवाओं के विस्तृत विकल्प उपलब्ध हैं। बाजारों में वस्तुओं के बहुव्यापी विकल्प अपेक्षाकृत नवीन परिघटना है।
बीसवीं शताब्दी के मध्य तक
- उत्पादन देशों की सीमाओं के अंदर सीमित था
- व्यापार ही देशों को जोड़ने का मुख्य माध्यम
- उपनिवेशों से कच्चा माल, तैयार वस्तुओं का आयात
आज का युग
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का उदय
- उत्पादन विश्व भर में फैला हुआ
- विस्तृत विकल्प उपलब्ध
सूचना के स्त्रोत (Information Sources)
ILO
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन
www.ilo.org
न्यायसंगत वैश्वीकरण की अपील
WTO
विश्व व्यापार संगठन
www.wto.org
व्यापार समझौतों की जानकारी
Corporate Watch
MNC आलोचनात्मक जाँच
www.corporatewatch.org.uk
बहुराष्ट्रीय कंपनियों की निगरानी
आधुनिक बाजार में उपलब्ध उत्पाद
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (MNCs)
Multinational Corporations
परिभाषा
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) वह है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।
MNC अन्य देशों में क्यों जाती हैं?
कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रमिक
उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता
उत्पादन लागत में कटौती
मुनाफे में वृद्धि
MNC उत्पादन का उदाहरण (औद्योगिक उपकरण)
डिज़ाइन
अमेरिका
पुर्ज़े निर्माण
चीन
जोड़ना
मेक्सिको/पूर्वी यूरोप
बिक्री
विश्व भर में
ग्राहक सेवा
भारत (कॉल सेंटर)
विश्व-भर के उत्पादन को जोड़ना
Interlinking Production Across Countries
उत्पादन विस्तार में लाभप्रद स्थान
चीन
सस्ता विनिर्माण केंद्र
मेक्सिको/पूर्वी यूरोप
अमेरिका और यूरोप के बाजारों से निकटता
भारत
कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवा
इससे MNC की लागत का 50-60 प्रतिशत बचत होती है!
सीमाओं के पार बहुराष्ट्रीय उत्पादन प्रक्रिया के प्रसार से असीमित लाभ प्राप्त किया जा सकता है। MNCs स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी करके, आपूर्ति के लिए उनका इस्तेमाल करके, या निकट प्रतिस्पर्धा करके/उन्हें खरीदकर दूरस्थ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं।
MNCs द्वारा उत्पादन नियंत्रण के तरीके
संयुक्त उत्पादन (Joint Production)
स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी
लाभ: अतिरिक्त निवेश + नवीनतम प्रौद्योगिकी
स्थानीय कंपनियों को खरीदना (Acquisition)
सबसे आम रास्ता
उदाहरण: कारगिल फूड्स ने परख फूड्स को खरीदा – अब भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक
छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना
वस्त्र, जूते-चप्पल, खेल के सामान
नियंत्रण: मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति, श्रम शर्तें
निवेश (Investment)
परिसंपत्तियों (जैसे भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरण) की खरीद में व्यय की गई मुद्रा।
विदेशी निवेश (Foreign Investment)
बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश, जो लाभ अर्जित करने की आशा से किया जाता है।
फोर्ड मोटर्स – केस स्टडी
विश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता
तथ्य:
- 26 देशों में प्रसार
- 1995 में भारत आई
- चेन्नई के निकट ₹1,700 करोड़ का निवेश
भारत में आने के कारण:
- विशाल बाजार का लाभ
- कम उत्पादन लागत
- स्थानीय पुर्ज़ा आपूर्तिकर्ता
- भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता
विदेश व्यापार और बाजारों का एकीकरण
Foreign Trade and Market Integration
विदेश व्यापार के लाभ
- उत्पादकों को घरेलू बाजारों से बाहर पहुँचने का अवसर
- विश्व के अन्य देशों के बाजारों में प्रतिस्पर्धा
- खरीदारों के लिए अधिक विकल्प
भारत में चीन के खिलौने – केस स्टडी
चीनी खिलौनों की सफलता:
- सस्ते दाम
- नवीन डिज़ाइन
परिणाम:
70-80%
एक वर्ष में दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया
भारतीय खरीदार
कम कीमत पर अधिक विकल्प
चीनी निर्माता
व्यवसाय फैलाने का अवसर
भारतीय निर्माता
खिलौने कम बिकते हैं – हानि
बाजारों का एकीकरण
- वस्तुओं का एक बाजार से दूसरे बाजार में आवागमन
- दो बाजारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है
- उत्पादक हजारों मील दूर होकर भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं
MNCs और विदेश व्यापार: जैसे फोर्ड मोटर्स का कार संयंत्र केवल भारत के लिए ही कारों का निर्माण नहीं करता, बल्कि वह अन्य देशों को भी कारें और पुर्ज़े निर्यात करता है। विदेश व्यापार का एक बड़ा भाग बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित है।
वैश्वीकरण क्या है?
What is Globalization?
परिभाषा
वैश्वीकरण (Globalization) विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है।
वैश्वीकरण में क्या-क्या का आदान-प्रदान होता है?
वस्तुएँ और सेवाएँ
निवेश
प्रौद्योगिकी
विदेश व्यापार
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
Factors Enabling Globalization
1
प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति
परिवहन प्रौद्योगिकी
- तीव्रतर आपूर्ति कम लागत पर
- कंटेनरों का उपयोग: ढुलाई-लागत में भारी बचत
- वायु यातायात की लागत में गिरावट
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (IT)
- टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स
- संचार उपग्रहों द्वारा सुगम
- इंटरनेट: ई-मेल, वॉइस मेल
संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग – उदाहरण
लंदन के पाठकों के लिए प्रकाशित पत्रिका की डिज़ाइनिंग और छपाई दिल्ली में की जाती है।
इंटरनेट
पाठ्य-विषय भेजना
दूरसंचार
निर्देश प्राप्त करना
ई-बैंकिंग
तत्काल भुगतान
विदेश व्यापार का उदारीकरण
Liberalization of Foreign Trade
व्यापार अवरोधक (Trade Barriers)
आयात पर कर (Tax) लगाना एक उदाहरण है। इसे अवरोधक इसलिए कहा गया है क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है।
उपयोग:
- विदेश व्यापार को नियमित करना
- किस प्रकार की वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयात हों
अन्य प्रकार:
कोटा (Quota): आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित करना
स्वतंत्रता के बाद – 1991 से पहले
- घरेलू उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण
- केवल अनिवार्य चीज़ों के आयात की अनुमति
- मशीनरी, उर्वरक, पेट्रोलियम
1991 के बाद – उदारीकरण
- विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा का समय
- अवरोधकों को हटाना
- गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता
उदारीकरण (Liberalization) की परिभाषा
सरकार द्वारा अवरोधकों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया।
व्यवसायियों को मुक्त रूप से यह निर्णय लेने की अनुमति कि वे क्या आयात या निर्यात करना चाहते हैं।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
World Trade Organization
WTO का ध्येय
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना
- शुरुआत विकसित देशों की पहल पर
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करना
- विश्व के लगभग 160 देश सदस्य हैं
व्यवहारिक असमानता
- WTO सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा देता है
- विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है
- विकासशील देशों को अवरोधकों को हटाने के लिए विवश किया
कृषि उत्पादों पर वाद-विवाद – उदाहरण
अमेरिका में कृषि:
- GDP में हिस्सा: 1%
- रोज़गार में हिस्सा: 0.5%
समस्या:
भारी सब्सिडी के कारण अमेरिकी किसान असाधारण रूप से कम कीमत पर बेच सकते हैं
परिणाम: विकासशील देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करता है
WTO के बारे में अतिरिक्त जानकारी
स्थापना: 1 जनवरी 1995
मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड
पूर्ववर्ती: GATT (General Agreement on Tariffs and Trade)
मुख्य समझौते:
• TRIPS (बौद्धिक संपदा)
• TRIMS (निवेश उपाय)
• Agreement on Agriculture
विकासशील देश विकसित देशों की सरकारों से सवाल कर रहे हैं कि वे WTO नियमों की अनदेखी करके अपने किसानों को धन राशि देना क्यों जारी रखे हुए हैं।
भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव
Impact of Globalization in India
सकारात्मक प्रभाव
उपभोक्ता लाभ (विशेषकर शहरी धनी वर्ग)
- अधिक विकल्प उपलब्ध
- उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत
- उच्चतर जीवन स्तर
MNC का निवेश और रोज़गार
सेलफ़ोन
मोटर गाड़ियाँ
इलेक्ट्रॉनिक्स
ठंडे पेय
जंक फूड
बैंकिंग
नए रोज़गार उत्पन्न हुए और स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं
भारतीय कंपनियों का उदय
कुछ बड़ी भारतीय कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरीं:
IT सेवा क्षेत्र को अवसर
- • डेटा एंट्री
- • लेखाकरण
- • प्रशासनिक कार्य
- • इंजीनियरिंग
ये सेवाएँ विकसित देशों को निर्यात की जाती हैं
नकारात्मक प्रभाव
वैश्वीकरण ने बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी की हैं।
प्रभावित उद्योग:
छोटे उत्पादकों की चुनौतियाँ
Challenges for Small Producers
रवि – संधारित्र निर्माता (केस स्टडी)
होसुर, तमिलनाडु
1992:
संधारित्र (Capacitors) बनाने वाली कंपनी शुरू की
2001:
WTO समझौते के अनुसार आयात प्रतिबंध हटे
परिणाम:
- भारतीय TV कंपनियाँ आयातित संधारित्र खरीदने लगीं (आधी कीमत)
- उत्पादन बहुत कम हो गया
- कई दोस्तों ने इकाइयाँ बंद कर दीं
श्रमिकों की समस्याएँ
- रोज़गार सुनिश्चित नहीं – नियोक्ता लचीलापन पसंद करते हैं
- अस्थायी रोज़गार – वर्ष भर वेतन नहीं
- बहुत लंबे कार्य-घंटे, रात में भी काम
- काफी कम मज़दूरी
- संरक्षण और लाभ नहीं (स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि)
वस्त्र निर्यात उद्योग में श्रमिकों की स्थिति
वस्त्र निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा से MNCs को अधिक लाभ कमाने में मदद मिली है, लेकिन श्रमिकों को वैश्वीकरण से मिले लाभों में न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।
- संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों की कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्रक के समान होती जा रही हैं
- वर्तमान में इस पर बहस चल रही है कि क्या कंपनियों को रोज़गार नीतियों के मुद्दे पर लचीलापन अपनाना चाहिए
विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones – SEZ)
विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें SEZ स्थापित कर रही हैं।
सुविधाएँ:
- विश्व स्तरीय सुविधाएँ (बिजली, पानी, सड़क)
- 5 वर्षों तक कोई कर नहीं
श्रम-कानूनों में लचीलापन:
कंपनियाँ श्रमिकों को छोटी अवधि के लिए रखती हैं, जिससे श्रम लागत में कटौती होती है।
न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष
Struggle for Fair Globalization
असमान प्रभाव
लाभान्वित
- • शिक्षित लोग
- • कुशल लोग
- • संपन्न लोग
प्रभावित
- • छोटे उत्पादक
- • श्रमिक
- • गरीब वर्ग
न्यायसंगत वैश्वीकरण
वह जो सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।
सरकार की भूमिका
- देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण करना
- श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना
- छोटे उत्पादकों को मदद करना जब तक वे सक्षम न हों
- आवश्यक होने पर व्यापार अवरोधकों का उपयोग करना
- WTO से “न्यायसंगत नियमों” के लिए समझौते करना
जनता की भूमिका
- विकासशील देशों को WTO में वर्चस्व के विरुद्ध मिलकर लड़ना होगा
- बड़े अभियानों और जनसंगठनों ने WTO के महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है
- जनता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है
ILO का न्यायसंगत वैश्वीकरण पर दृष्टिकोण
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने अपनी वेबसाइट पर न्यायसंगत वैश्वीकरण (Fair Globalization) की अपील की है।
मुख्य सिद्धांत:
- • सभी के लिए समान अवसर
- • श्रमिक अधिकारों का संरक्षण
- • सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
लक्ष्य:
- • गरीबी उन्मूलन
- • सतत विकास
- • सामाजिक न्याय
भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) – अतिरिक्त आँकड़े
प्रमुख निवेशक देश
मॉरीशस, सिंगापुर, USA, जापान, नीदरलैंड
प्रमुख क्षेत्र
सेवाएँ, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल
प्रमुख राज्य
महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात
मुख्य बिंदु – सारांश
Key Points Summary
वैश्वीकरण
- • देशों के बीच तीव्र एकीकरण
- • विदेश व्यापार और विदेशी निवेश द्वारा
- • MNCs मुख्य भूमिका में
- • प्रौद्योगिकी ने संभव बनाया
MNCs
- • एक से अधिक देशों में उत्पादन
- • सस्ता श्रम और संसाधन
- • 50-60% लागत बचत
- • स्थानीय कंपनियों का अधिग्रहण
उदारीकरण
- • 1991 से शुरू
- • व्यापार अवरोधकों को हटाना
- • WTO का दबाव
- • प्रतिस्पर्धा में वृद्धि
न्यायसंगत वैश्वीकरण
- • सभी के लिए अवसर
- • लाभों में बेहतर हिस्सेदारी
- • सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण
- • श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा
वैश्वीकरण से लाभ धनी उपभोक्ता और कुशल, शिक्षित उत्पादकों को मिला है, जबकि छोटे उत्पादक और श्रमिक प्रभावित हुए हैं। न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए आवश्यक है।