सत्ता की साझेदारी
Power Sharing – लोकतांत्रिक शासन का मूल सिद्धांत
सत्ता की साझेदारी क्या है?
सत्ता की साझेदारी लोकतांत्रिक शासन का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें सत्ता को विभिन्न समूहों, संस्थाओं और स्तरों के बीच बांटा जाता है। यह एकाधिकारवादी शासन के विपरीत है जहां सत्ता किसी एक व्यक्ति या समूह के हाथ में केंद्रित होती है।
“लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी आवश्यक है क्योंकि यह विविधता का सम्मान करता है और सामाजिक टकराव को कम करता है।”
साझेदारी में
- • विभिन्न समूहों की भागीदारी
- • सत्ता का विकेंद्रीकरण
- • आपसी विश्वास और सहयोग
- • स्थायित्व और शांति
एकाधिकार में
- • एक समूह का वर्चस्व
- • सत्ता का केंद्रीकरण
- • अविश्वास और संघर्ष
- • अस्थिरता और तनाव
बेल्जियम की कहानी – सामंजस्य का मार्ग
भौगोलिक स्थिति
बेल्जियम यूरोप का एक छोटा देश है जो फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्जमबर्ग से घिरा है। क्षेत्रफल में हरियाणा के आधे से भी छोटा लेकिन जनसंख्या में अधिक।
जातीय संरचना
| समुदाय | प्रतिशत | भाषा | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| डच भाषी (फ्लेमिश) | 59% | डच | फ्लेंडर्स क्षेत्र (उत्तर) |
| फ्रेंच भाषी | 40% | फ्रेंच | वेलोनिया क्षेत्र (दक्षिण) |
| जर्मन भाषी | 1% | जर्मन | पूर्वी सीमा क्षेत्र |
ब्रसेल्स की विशेष स्थिति
राजधानी ब्रसेल्स में 80% फ्रेंच भाषी और 20% डच भाषी रहते हैं, जबकि यह डच भाषी क्षेत्र से घिरा है। यह जटिलता को और बढ़ाता है।
बेल्जियम का समाधान – संवैधानिक व्यवस्था
समान प्रतिनिधित्व
केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषियों को समान प्रतिनिधित्व। कोई भी समूह एकतरफा निर्णय नहीं ले सकता।
राज्य सरकारें
दोनों क्षेत्रों की राज्य सरकारें किसी एक समुदाय के अधीन नहीं हैं।
ब्रसेल्स की व्यवस्था
अलग सरकार जिसमें दोनों समुदायों को समान प्रतिनिधित्व।
सामुदायिक सरकार
भाषा, संस्कृति और शिक्षा जैसे मामलों के लिए तीसरे स्तर की सरकार।
बेल्जियम मॉडल की सफलता
बेल्जियम ने अपने संविधान में चार बार संशोधन करके यह जटिल व्यवस्था बनाई। इससे देश में शांति और स्थिरता बनी रही। यह दर्शाता है कि विविधता को सम्मान देकर और सत्ता बांटकर संघर्ष से बचा जा सकता है।
बेल्जियम – देश प्रोफाइल (नवंबर 2025)
जनसंख्या: 1,18,25,551 (जनवरी 2025)
राजधानी: ब्रसेल्स (जनसंख्या: 21.4 लाख)
प्रति व्यक्ति GDP: $44,837 (2024)
स्वतंत्रता: 1830 (नीदरलैंड से)
औसत आयु: 42 वर्ष
विश्व रैंक: 83वां (जनसंख्या में)
विशेष: यूरोप का पहला औद्योगिक देश
महत्व: EU और NATO का मुख्यालय
यूरोपीय संघ (European Union) और ब्रसेल्स
ब्रसेल्स को अनौपचारिक रूप से “यूरोपीय संघ की राजधानी” कहा जाता है क्योंकि यहां EU की प्रमुख संस्थाएं स्थित हैं:
- यूरोपीय आयोग (European Commission) – Berlaymont भवन में
- यूरोपीय संसद (European Parliament) – आंशिक रूप से
- यूरोपीय परिषद (European Council) – त्रैमासिक शिखर सम्मेलन
- मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)
सदस्य देश: 27 (2025 में) | संस्थापक: फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग, इटली (1957)
नवीनतम सदस्य: क्रोएशिया (2013) | जुलाई 2025 अध्यक्षता: डेनमार्क
NATO (North Atlantic Treaty Organization)
ब्रसेल्स NATO का भी मुख्यालय है। NATO एक सैन्य गठबंधन है जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। यह सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत मानता है – एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। 2025 में इसके 32 सदस्य देश हैं।
श्रीलंका की कहानी – बहुसंख्यकवाद का मार्ग
भौगोलिक स्थिति
श्रीलंका भारत के दक्षिण में स्थित एक द्वीपीय देश है। यहां दो प्रमुख समुदाय – सिंहली और तमिल – निवास करते हैं।
जातीय संरचना
| समुदाय | प्रतिशत | भाषा | धर्म |
|---|---|---|---|
| सिंहली | 74% | सिंहली | बौद्ध |
| श्रीलंकाई तमिल | 13% | तमिल | हिंदू/ईसाई |
| भारतीय तमिल | 5% | तमिल | हिंदू |
| अन्य (मुस्लिम आदि) | 8% | विविध | विविध |
बहुसंख्यकवादी नीतियों की समयरेखा
श्रीलंका को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली
सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया, तमिल की उपेक्षा
विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहलियों को प्राथमिकता की नीति
बौद्ध धर्म को संरक्षण और प्राथमिकता देने का प्रावधान
तमिल विद्रोह और हिंसक गृहयुद्ध, हजारों लोगों की मृत्यु
बहुसंख्यकवाद के परिणाम
- तमिलों में अलगाव और अविश्वास की भावना
- दो समुदायों के बीच टकराव
- लंबा और विनाशकारी गृहयुद्ध (1983-2009)
- हजारों लोगों की मृत्यु और विस्थापन
- आर्थिक विकास में बाधा
- सामाजिक ताना-बाना कमजोर
श्रीलंकाई तमिल vs भारतीय तमिल
श्रीलंकाई तमिल: श्रीलंका के मूल निवासी जो सदियों से वहां रहते हैं।
भारतीय तमिल: औपनिवेशिक काल में चाय बागानों में काम करने के लिए भारत से लाए गए।
श्रीलंका – देश प्रोफाइल (नवंबर 2025)
जनसंख्या: 2,32,29,470 (2025)
राजधानी: श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे (प्रशासनिक)
आर्थिक राजधानी: कोलंबो (जनसंख्या: 6.47 लाख)
प्रति व्यक्ति GDP: $4,516 (2024)
औसत आयु: 31.1 वर्ष
जीवन प्रत्याशा: 75.94 वर्ष
विश्व रैंक: 60वां (जनसंख्या में)
स्वतंत्रता: 1948 (ब्रिटेन से)
नोट: कोलंबो एक प्राचीन व्यापारिक बंदरगाह है जो पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार मार्ग पर स्थित था। 1982 तक यह विधायी राजधानी भी था।
श्रीलंका का आर्थिक संकट (2022)
2022 में श्रीलंका ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक संकट झेला। देश दिवालिया हो गया, विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त हो गए, ईंधन और खाद्य पदार्थों की भारी कमी हुई। जनता के विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़ना पड़ा। यह संकट अक्सर गलत नीतियों और भ्रष्टाचार का परिणाम माना जाता है।
गृहयुद्ध की समाप्ति (2009)
26 साल का गृहयुद्ध मई 2009 में समाप्त हुआ जब श्रीलंकाई सेना ने LTTE (Liberation Tigers of Tamil Eelam) को पराजित किया। इस युद्ध में अनुमानित 80,000-100,000 लोग मारे गए। हालांकि युद्ध समाप्त हो गया, लेकिन जातीय सामंजस्य अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
LTTE और राजीव गांधी की हत्या
LTTE (Liberation Tigers of Tamil Eelam) क्या था?
- स्थापना: 1976, संस्थापक: वेलुपिल्लई प्रभाकरन
- उद्देश्य: श्रीलंका में स्वतंत्र तमिल राज्य “ईलम” की स्थापना
- विशेषता: आत्मघाती हमलों का प्रयोग करने वाला पहला संगठन
- कई देशों द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित
राजीव गांधी की हत्या (21 मई 1991)
- स्थान: श्रीपेरंबदूर, तमिलनाडु (चुनाव रैली)
- हत्यारी: थेनमोझी राजरत्नम (धनु) – LTTE आत्मघाती हमलावर
- तरीका: बेल्ट बम से आत्मघाती हमला
- मृतक: राजीव गांधी सहित 14 अन्य लोग
हत्या का कारण:
1987 में भारत-श्रीलंका समझौते के तहत राजीव गांधी ने IPKF (Indian Peace Keeping Force) को श्रीलंका भेजा था। IPKF और LTTE के बीच संघर्ष हुआ जिससे LTTE ने राजीव गांधी को दुश्मन मान लिया।
परिणाम:
- भारत में LTTE पर प्रतिबंध (1992)
- 26 दोषियों को सजा (4 को फांसी, बाद में उम्रकैद में बदली)
- 21 मई को “आतंकवाद विरोधी दिवस” के रूप में मनाया जाता है
बेल्जियम और श्रीलंका: तुलनात्मक अध्ययन
| पहलू | बेल्जियम | श्रीलंका |
|---|---|---|
| दृष्टिकोण | सामंजस्य और साझेदारी | बहुसंख्यकवाद और वर्चस्व |
| अल्पसंख्यकों का व्यवहार | समान अधिकार और प्रतिनिधित्व | भेदभाव और उपेक्षा |
| भाषा नीति | तीनों भाषाओं को मान्यता | केवल सिंहली को राजभाषा |
| सत्ता संरचना | विकेंद्रीकृत, बहुस्तरीय | केंद्रीकृत, एकाधिकार |
| परिणाम | शांति, स्थिरता, एकता | गृहयुद्ध, विभाजन, अस्थिरता |
| सबक | विविधता में एकता संभव | बहुसंख्यकवाद विनाशकारी |
मुख्य सीख: दोनों देशों की कहानी बताती है कि सत्ता की साझेदारी राष्ट्रीय एकता और शांति के लिए आवश्यक है। बेल्जियम ने साझेदारी चुनी और सफल रहा, जबकि श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद चुना और गृहयुद्ध झेला।
विश्व में अन्य उदाहरण
- स्विट्जरलैंड: 4 भाषाओं (जर्मन, फ्रेंच, इतालवी, रोमांश) वाला संघीय राज्य – सफल सामंजस्य
- कनाडा: अंग्रेजी और फ्रेंच भाषी समुदायों के बीच सत्ता साझेदारी
- यूगोस्लाविया: जातीय तनाव से देश का विघटन (1990s)
- रवांडा: हुतू-तुत्सी संघर्ष और नरसंहार (1994)
GDP तुलना (2024)
बेल्जियम
$44,837 प्रति व्यक्ति
विश्व औसत का 355%
श्रीलंका
$4,516 प्रति व्यक्ति
विश्व औसत का 33%
बेल्जियम की GDP श्रीलंका से लगभग 10 गुना अधिक है। स्थिर शासन और सामाजिक शांति आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism)
परिभाषा
बहुसंख्यकवाद वह विचारधारा है जिसमें बहुसंख्यक समुदाय अपनी इच्छा से शासन चलाता है और अल्पसंख्यकों की जरूरतों और इच्छाओं की उपेक्षा करता है। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
बहुसंख्यकवाद की विशेषताएं
शासन पर एकाधिकार
बहुसंख्यक समुदाय सभी महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेता है।
अल्पसंख्यकों की उपेक्षा
छोटे समुदायों की आवाज़ और अधिकारों को नज़रअंदाज़ किया जाता है।
सांस्कृतिक वर्चस्व
बहुसंख्यक की भाषा, धर्म और संस्कृति को थोपा जाता है।
भेदभावपूर्ण नीतियां
शिक्षा, नौकरी और अवसरों में पक्षपात।
लोकतंत्र vs बहुसंख्यकवाद
सच्चा लोकतंत्र: बहुमत का शासन + अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा
बहुसंख्यकवाद: केवल बहुमत का शासन, अल्पसंख्यकों की उपेक्षा
बहुसंख्यकवाद लोकतंत्र का विकृत रूप है जो अंततः सामाजिक विभाजन और संघर्ष को जन्म देता है।
सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी?
समझदारी का तर्क (Prudential)
व्यावहारिक और दूरदर्शी कारण – संघर्ष से बचने और स्थिरता बनाए रखने के लिए:
- विभिन्न समूहों के बीच टकराव कम होता है
- राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती है
- बहुसंख्यकवाद से देश का विभाजन हो सकता है
- अल्पसंख्यकों को भी हिस्सेदारी मिलने से वे व्यवस्था से जुड़े रहते हैं
नैतिक तर्क (Moral)
लोकतंत्र की मूल भावना और सही-गलत के आधार पर:
- लोकतंत्र की मूल भावना है नागरिकों की भागीदारी
- हर नागरिक को शासन में हिस्सा लेने का अधिकार
- वैध सरकार वही जो सभी समूहों का प्रतिनिधित्व करे
- विविधता का सम्मान लोकतंत्र का आधार है
महत्वपूर्ण: दोनों तर्क महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नैतिक तर्क अधिक मूलभूत है क्योंकि यह लोकतंत्र के मूल्यों पर आधारित है। समझदारी का तर्क केवल परिणाम पर केंद्रित है।
लेबनान का उदाहरण
लेबनान में राष्ट्रपति ईसाई, प्रधानमंत्री सुन्नी मुस्लिम और स्पीकर शिया मुस्लिम होता है। यह व्यवस्था 1943 से चली आ रही है। हालांकि यह कठोर व्यवस्था है, लेकिन इसने विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच शांति बनाए रखने में मदद की है।
सत्ता की साझेदारी के रूप
आधुनिक लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी के चार प्रमुख रूप हैं:
1. क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution)
सरकार के विभिन्न अंगों मेंसरकार के विभिन्न अंगों – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका – के बीच सत्ता का बंटवारा।
विधायिका
कानून बनाना
कार्यपालिका
कानून लागू करना
न्यायपालिका
कानून की व्याख्या
उद्देश्य: नियंत्रण और संतुलन (Checks and Balances) – कोई भी अंग असीमित शक्ति का प्रयोग न कर सके।
2. ऊर्ध्वाधर वितरण (Vertical Distribution)
सरकार के विभिन्न स्तरों मेंसरकार के विभिन्न स्तरों – केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार – के बीच सत्ता का बंटवारा।
केंद्र सरकार
राष्ट्रीय महत्व के विषय
राज्य/प्रांतीय सरकार
राज्य स्तर के विषय
स्थानीय सरकार
पंचायत, नगरपालिका
भारत में: संघीय व्यवस्था के तहत केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर शक्तियों का संवैधानिक विभाजन।
भारत में तीसरा स्तर: पंचायती राज व्यवस्था
भारत में 73वां संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया गया। यह 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ (इसलिए 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है)।
त्रिस्तरीय पंचायती राज संरचना:
जिला पंचायत
जिला स्तर
पंचायत समिति
ब्लॉक/तहसील स्तर
ग्राम पंचायत
गांव स्तर
मुख्य विशेषताएं:
- अनुसूची 11: 29 विषय पंचायतों को सौंपे गए (कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि)
- आरक्षण: SC/ST के लिए जनसंख्या अनुपात में, महिलाओं के लिए 33% (अब कई राज्यों में 50%)
- कार्यकाल: 5 वर्ष, समय पर चुनाव अनिवार्य
- वित्त आयोग: राज्य वित्त आयोग द्वारा धन आवंटन
- ग्राम सभा: प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण
74वां संविधान संशोधन (शहरी क्षेत्र)
शहरों के लिए नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगम की व्यवस्था। अनुसूची 12 में 18 विषय सौंपे गए।
यह विश्व का सबसे बड़ा विकेंद्रीकरण प्रयोग है – लगभग 2.5 लाख पंचायतें और 30 लाख से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि।
3. सामाजिक समूहों में साझेदारी
विभिन्न सामाजिक समूहों के बीचविभिन्न सामाजिक समूहों – धार्मिक, भाषाई, जातीय समुदायों – के बीच सत्ता की साझेदारी।
सामुदायिक सरकार (बेल्जियम)
भाषाई समुदायों को अपने मामलों में स्वायत्तता।
आरक्षण प्रणाली (भारत)
SC, ST, OBC को विधायिका और नौकरियों में आरक्षण।
उद्देश्य: अल्पसंख्यक और वंचित समुदायों को सत्ता में भागीदारी देना।
4. दबाव समूहों और आंदोलनों के माध्यम से
राजनीतिक दलों और हित समूहों के बीचराजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों के माध्यम से सत्ता में भागीदारी।
राजनीतिक दल
चुनाव और सत्ता में प्रतिस्पर्धा
दबाव समूह
व्यापारी संघ, किसान संगठन
सामाजिक आंदोलन
नागरिक समाज की आवाज़
महत्व: गठबंधन सरकारें, विपक्षी दल और नागरिक समाज सरकार पर नियंत्रण रखते हैं।
चारों रूपों का संबंध
ये चारों रूप एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और मिलकर एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाते हैं। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में चारों रूप देखे जा सकते हैं – संघीय व्यवस्था (ऊर्ध्वाधर), शक्ति पृथक्करण (क्षैतिज), आरक्षण (सामाजिक), और बहुदलीय व्यवस्था (दबाव समूह)।
भारत में सत्ता की साझेदारी
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सत्ता की साझेदारी के सभी रूप मौजूद हैं:
- संघीय व्यवस्था: 28 राज्य + 8 केंद्र शासित प्रदेश
- त्रिस्तरीय पंचायती राज: 73वां और 74वां संविधान संशोधन (1992)
- आरक्षण: SC (15%), ST (7.5%), OBC (27%) को संसद और विधानसभाओं में
- गठबंधन सरकारें: NDA, UPA जैसे बहुदलीय गठबंधन
- भाषाई राज्य: 1956 में भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन
Consociational Democracy (सहमति लोकतंत्र)
यह एक विशेष प्रकार का लोकतंत्र है जो गहरे विभाजित समाजों में काम करता है। इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:
- Grand Coalition (महागठबंधन) – सभी प्रमुख समूहों की सरकार में भागीदारी
- Mutual Veto (पारस्परिक वीटो) – अल्पसंख्यकों को निर्णयों पर वीटो का अधिकार
- Proportionality (आनुपातिकता) – जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व
- Segmental Autonomy (खंडीय स्वायत्तता) – समुदायों को अपने मामलों में स्वतंत्रता
उदाहरण: बेल्जियम, लेबनान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड
महत्वपूर्ण राजनीतिक विचारक
Arend Lijphart: Consociational Democracy के सिद्धांत के प्रवर्तक
Montesquieu: शक्ति पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत के जनक
सारांश – मुख्य बिंदु
मुख्य अवधारणाएं
- सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र का मूल सिद्धांत
- बहुसंख्यकवाद से टकराव और अस्थिरता
- साझेदारी से शांति और एकता
- नैतिक और व्यावहारिक दोनों कारण महत्वपूर्ण
केस स्टडी से सीख
- बेल्जियम: सामंजस्य = सफलता
- श्रीलंका: बहुसंख्यकवाद = गृहयुद्ध
- विविधता का सम्मान आवश्यक
- संवैधानिक व्यवस्था से समाधान संभव
साझेदारी के 4 रूप
क्षैतिज
विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका
ऊर्ध्वाधर
केंद्र-राज्य-स्थानीय
सामाजिक
विभिन्न समुदायों में
दबाव समूह
दल और आंदोलन
परीक्षा के लिए याद रखें
- बेल्जियम: 59% डच, 40% फ्रेंच, 1% जर्मन – सामंजस्य मॉडल
- श्रीलंका: 74% सिंहली, 18% तमिल – बहुसंख्यकवाद → गृहयुद्ध
- समझदारी का तर्क: व्यावहारिक कारण – स्थिरता के लिए
- नैतिक तर्क: लोकतंत्र की मूल भावना – भागीदारी का अधिकार
- लेबनान: धार्मिक साझेदारी का उदाहरण