खनिज और ऊर्जा संसाधन Minerals and Energy Resources
भूगोल का एक महत्वपूर्ण अध्याय: खनिजों का वर्गीकरण, संरक्षण और भारत के ऊर्जा संसाधन
परिचय और महत्व
Definition and Importance of Minerals
खनिज क्या है?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।
ये प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं – कठोर हीरा से लेकर नरम चूना तक।
जीवन का आधार: सुई से लेकर बड़े जहाज तक, और रेलवे लाइन से लेकर सड़क के पत्थर तक – सब खनिजों से बने हैं। यद्यपि हमारे कुल भोजन में खनिजों का अंश केवल 0.3% है, परंतु इनके बिना हम शेष 99.7% भोजन का उपयोग करने में असमर्थ होंगे।
भारत में खनिजों का वितरण
Regional Distribution Pattern
भूगर्भिक संरचना में अंतर के कारण भारत में खनिजों का वितरण असमान है। इसे मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में समझा जा सकता है:
प्रायद्वीपीय पठार (Peninsular Plateau)
यह खनिजों का भंडार गृह है। यहाँ कोयला, धात्विक खनिज (लोहा, मैंगनीज), अभ्रक और अन्य अधात्विक खनिजों के अधिकांश भंडार पाए जाते हैं।
गुजरात और असम
यहाँ की अवसादी चट्टानों (Sedimentary rocks) में खनिज तेल (Petroleum) के निक्षेप पाए जाते हैं।
राजस्थान
यहाँ की चट्टान प्रणाली में अनेक अलौह खनिज (Non-ferrous minerals) पाए जाते हैं।
खनिजों की उपलब्धता
Modes of Occurrence – खनिज कहाँ पाए जाते हैं?
खनिज प्रायः अयस्कों (Ores) में पाए जाते हैं। अयस्क का अर्थ है – अन्य तत्वों के साथ किसी खनिज का मिश्रण।
आग्नेय और कायांतरित चट्टानें
Igneous and Metamorphic Rocks
- • दरारों, जोड़ों और भ्रंशों में मिलते हैं।
- • छोटे जमाव: शिराएं (Veins)
- • बड़े जमाव: परत (Lodes)
- • उदाहरण: जस्ता, तांबा, जिंक, सीसा।
अवसादी चट्टानें
Sedimentary Rocks
- • परतों या संस्तरों (Layers) में पाए जाते हैं।
- • निक्षेपण और संचयन का परिणाम।
- • उदाहरण: कोयला, कुछ लौह अयस्क, जिप्सम, पोटाश, नमक।
धरातलीय चट्टानों का अपघटन
Decomposition of Surface Rocks
- • घुलनशील तत्वों के अपरदन के बाद बची हुई चट्टानें।
- • उदाहरण: बॉक्साइट (Bauxite)।
जलोढ़ जमाव (प्लेसर निक्षेप)
Alluvial/Placer Deposits
- • घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में।
- • ये जल द्वारा घर्षित नहीं होते।
- • उदाहरण: सोना, चांदी, टिन, प्लैटिनम।
महासागरीय जल (Ocean Waters)
महासागरीय जल में भी खनिज होते हैं, पर वे बहुत बिखरे हुए (widely diffused) होते हैं।
- • नमक
- • मैग्नीशियम
- • ब्रोमीन
- • मैंगनीज ग्रंथिकाएं (Manganese Nodules) – महासागर तली में।
लौह खनिज (Ferrous Minerals)
कुल धात्विक खनिजों के उत्पादन का 3/4 भाग
मैग्नेटाइट (Magnetite)
सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क
- • 70% लोहांश
- • सर्वश्रेष्ठ चुंबकीय गुण
- • विद्युत उद्योग में उपयोगी
हेमेटाइट (Hematite)
सर्वाधिक महत्वपूर्ण औद्योगिक अयस्क
- • 50-60% लोहांश
- • मात्रा की दृष्टि से सर्वाधिक उपयोग
भारत की प्रमुख लौह अयस्क पेटियाँ
(नोट: ‘बैलाडिला’ का अर्थ है बैल के कूबड़ जैसा)
(नोट: कन्नड़ में ‘कुद्रे’ का अर्थ है घोड़ा)
मैंगनीज (Manganese)
इस्पात (Steel) बनाने में मुख्य रूप से उपयोग होता है।
1 टन इस्पात = 10 किग्रा मैंगनीज की आवश्यकता होती है।
इसका उपयोग ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक और पेंट बनाने में भी होता है।
अलौह और अधात्विक खनिज
तांबा, बॉक्साइट, अभ्रक और चूना पत्थर
तांबा (Copper)
स्थिति चिंताजनक: भारत में भंडार और उत्पादन क्रांतिक रूप से न्यून है।
गुण: आघातवर्ध्य, तन्य और ताप सुचालक (बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक्स)।
प्रमुख खदानें:
1. बालाघाट (MP) – 52% उत्पादन
2. खेतड़ी (राजस्थान)
3. सिंहभूम (झारखंड)
बॉक्साइट (Bauxite)
एल्यूमीनियम इसी से प्राप्त होता है। यह लोहे जैसी मजबूती के साथ अत्यधिक हल्का होता है।
प्रमुख क्षेत्र:
अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियाँ।
ओडिशा (65%) सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है (पंचपतमाली निक्षेप, कोरापुट)।
अभ्रक (Mica)
पन्नों/चादरों (Sheets) के रूप में पाया जाता है। विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में अनिवार्य (उच्च वोल्टेज प्रतिरोध के कारण)।
प्रमुख पेटी: छोटा नागपुर पठार का उत्तरी किनारा। कोडरमा-गया-हजारीबाग पेटी (झारखंड) अग्रणी उत्पादक।
चूना पत्थर (Limestone)
कैल्शियम कार्बोनेट से बनी चट्टानों में पाया जाता है।
उपयोग: सीमेंट उद्योग का आधारभूत कच्चा माल और लौह-प्रगलन भट्टियों के लिए अनिवार्य।
खनन के खतरे
“Killer Industry” (घातक उद्योग)
- साँस की बीमारियाँ (धूल और हानिकारक धुएं से)।
- खदानों की छत गिरना और जल भराव (आग लगने का खतरा)।
- जल स्रोतों का संदूषण और भूमि का क्षरण (मलवे के ढेर से)।
रैट होल (Rat Hole) खनन
पूर्वोत्तर भारत (मेघालय) में खनिज स्वामित्व व्यक्तियों/समुदायों के पास है। जोवाई और चेरापूंजी में परिवार के सदस्य लंबी संकीर्ण सुरंग बनाकर कोयला खनन करते हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इसे अवैध घोषित किया है।
ऊर्जा संसाधन
वर्गीकरण (Classification)
परंपरागत (Conventional)
लंबे समय से प्रयोग में, अनवीकरणीय
गैर-परंपरागत (Non-Conventional)
नवीकरणीय, भविष्य की ऊर्जा
परंपरागत स्रोत
कोयला (Coal)
भारत का प्रमुख ऊर्जा स्रोत। वाणिज्यिक ऊर्जा की निर्भरता इसी पर है। संपीड़न की मात्रा और गहराई के आधार पर 4 प्रकार:
निम्न कार्बन, उच्च नमी
नेवेली (तमिलनाडु) में भंडार
विद्युत उत्पादन में
धातु शोधन में उपयोगी
कठोर कोयला
1. गोंडवाना (200 लाख वर्ष): दामोदर घाटी (पं. बंगाल, झारखंड)। झरिया, रानीगंज, बोकारो प्रमुख क्षेत्र।
2. टर्शियरी (55 लाख वर्ष): पूर्वोत्तर भारत (मेघालय, असम, अरुणाचल)।
पेट्रोलियम (खनिज तेल)
कोयले के बाद दूसरा प्रमुख स्रोत। टर्शियरी चट्टानों की अपनति (anticline) में पाया जाता है।
- • मुंबई हाई (63%)
- • गुजरात (अंकलेश्वर)
- • असम (डिगबोई – सबसे पुराना)
रिफाइनरी: यह सिंथेटिक वस्त्र, उर्वरक और रसायन उद्योगों के लिए ‘नोडिए बिन्दु’ का काम करती है।
प्राकृतिक गैस
स्वच्छ ऊर्जा संसाधन (कम CO2)। CNG और PNG के रूप में उपयोग। कृष्णा-गोदावरी बेसिन में नए भंडार मिले हैं।
HVJ पाइपलाइन (1700 किमी): हजीरा – विजयपुर – जगदीशपुर। यह गैस को पश्चिम और उत्तर भारत के उर्वरक/विद्युत संयंत्रों तक पहुँचाती है।
विद्युत उत्पादन (Electricity)
प्रति व्यक्ति विद्युत उपभोग विकास का सूचकांक माना जाता है।
1. जल विद्युत (Hydro)
गिरते जल से टर्बाइन चलाकर। यह नवीकरणीय है।
उदाहरण: भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी, कोपिली।
2. ताप विद्युत (Thermal)
कोयला, पेट्रोलियम या गैस जलाकर। यह अनवीकरणीय है। प्रदूषण करता है।
गैर-परंपरागत स्रोत
Renewable Energy Resources
ग्रामीण ऊर्जा संकट:
ग्रामीण भारत में 70% ऊर्जा अभी भी ईंधन की लकड़ी और उपलों से आती है।
समस्या: वनों का ह्रास होता है और गोबर (जो कि बेहतरीन खाद है) जल जाता है।
समाधान: सौर ऊर्जा और बायोगैस।
परमाणु ऊर्जा
अणुओं की संरचना को बदलने से प्राप्त ऊष्मा।
यूरेनियम/थोरियम: झारखंड, राजस्थान (अरावली)।
मोनाजाइट रेत: केरल (थोरियम)।
सौर ऊर्जा
भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है। फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे बिजली में बदला जाता है।
पवन ऊर्जा
भारत में विशाल क्षमता।
सबसे बड़ी पेटी: नागरकोइल (तमिलनाडु) से मदुरई तक। जैसलमेर भी प्रसिद्ध है।
बायोगैस
झाड़ियों, कृषि अपशिष्ट और गोबर से उत्पादन (गोबर गैस प्लांट)।
लाभ: किसानों को ऊर्जा + उन्नत उर्वरक दोनों मिलता है।
ज्वारीय ऊर्जा
महासागरीय तरंगों का उपयोग।
आदर्श दशाएं: खंभात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी (गुजरात) और सुंदरबन।
भू-तापीय
पृथ्वी के आंतरिक ताप से।
परियोजनाएं: मणिकरण (हिमाचल) और पूगा घाटी (लद्दाख)।
विस्तृत मानचित्र कार्य (Map List)
Comprehensive List of Important Locations
मानचित्र 1: भारत के महत्वपूर्ण खनिज (Important Minerals)
I. धात्विक खनिज (Metallic Minerals)
| खनिज (Mineral) | राज्य (State) | स्थान / खदान (Place / Mine / Details) |
|---|---|---|
| लौह अयस्क (Iron Ore) | ओडिशा (Odisha) | मयूरभंज (बादाम पहाड़), क्योंझर, सुंदरगढ़ |
| झारखंड (Jharkhand) | गुआ (Gua), नोआमुंडी (Noamundi – सिंहभूम जिला) | |
| छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) | बैलाडिला (बस्तर – विशाखापत्तनम से निर्यात), डल्ली-राजहरा (दुर्ग – भिलाई को आपूर्ति) | |
| कर्नाटक (Karnataka) | कुद्रेमुख (100% निर्यात), बल्लारी, चित्रदुर्ग, तुमकूरु | |
| महाराष्ट्र/गोवा | रत्नागिरी, चंद्रपुर, मार्मागाओ (पत्तन) | |
| मैंगनीज (Manganese) | मध्य प्रदेश | बालाघाट (50% उत्पादन) |
| महाराष्ट्र | नागपुर, भंडारा | |
| ओडिशा | सुंदरगढ़ (प्रमुख उत्पादक राज्य) | |
| बॉक्साइट (Bauxite) | ओडिशा | पंचपतमाली (कोरापुट – सबसे बड़ा भंडार), संबलपुर |
| मध्य प्रदेश | अमरकंटक पठार, कटनी | |
| छत्तीसगढ़ | बिलासपुर, मैकाल पहाड़ियाँ | |
| महाराष्ट्र | कोलाबा, ठाणे, रत्नागिरी | |
| तांबा (Copper) | मध्य प्रदेश | बालाघाट (मलांजखंड – 52% उत्पादन) |
| राजस्थान | खेतड़ी (झुंझुनू), अलवर (खो-दरीबा) | |
| झारखंड | सिंहभूम (घाटशिला) |
II. अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)
| खनिज (Mineral) | राज्य (State) | स्थान / विवरण (Location / Details) |
|---|---|---|
| अभ्रक (Mica) | झारखंड | कोडरमा (भारत की अभ्रक राजधानी), हजारीबाग, गिरिडीह |
| राजस्थान | अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा | |
| आंध्र प्रदेश | नेल्लोर (सर्वोत्तम किस्म) | |
| चूना पत्थर (Limestone) | विभिन्न राज्य | निंबाहेड़ा (राजस्थान), कटनी (MP), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश |
III. ऊर्जा संसाधन (Conventional Energy)
मानचित्र 2: परंपरागत ऊर्जा संसाधन (Conventional Energy Resources)
| संसाधन (Resource) | प्रकार/क्षेत्र | प्रमुख खदानें / क्षेत्र (Key Locations) |
|---|---|---|
| कोयला (Coal) | गोंडवाना (Gondwana) |
झारखंड: झरिया (सबसे बड़ा), बोकारो प. बंगाल: रानीगंज (सबसे पुराना) छत्तीसगढ़: कोरबा ओडिशा: तालचेर मध्य प्रदेश: सिंगरौली तेलंगाना: सिंगरेनी |
| टर्शियरी (Tertiary) |
तमिलनाडु: नेवेली (लिग्नाइट) असम: माकूम मेघालय: चेरापूंजी (रैट होल खनन) |
|
| पेट्रोलियम (Petroleum) | असम (Assam) | डिगबोई (सबसे पुराना), नहरकटिया, मोरन-हुगरीजन |
| गुजरात (Gujarat) | अंकलेश्वर, कलोल | |
| अपतटीय (Offshore) | मुंबई हाई (63% उत्पादन), बेसिन, रावा (KG बेसिन) | |
| प्राकृतिक गैस | पाइपलाइन | HVJ पाइपलाइन: हजीरा (गुजरात) – विजयपुर (MP) – जगदीशपुर (UP) |
IV. विद्युत संयंत्र (Power Plants)
मानचित्र 3: विद्युत संयंत्र – तापीय और आणविक (Power Plants)
| प्रकार (Type) | प्रमुख संयंत्र (Major Plants) |
|---|---|
| आणविक (Nuclear) |
|
| तापीय (Thermal) |
|
V. गैर-परंपरागत ऊर्जा (Emerging)
| ऊर्जा (Energy) | प्रमुख स्थान (Key Locations) |
|---|---|
| सौर (Solar) | भादला (राजस्थान – विश्व का सबसे बड़ा पार्क), पावागढ़ (कर्नाटक), कुरनूल (आंध्र प्रदेश) |
| पवन (Wind) | मुप्पंडल (तमिलनाडु – सबसे बड़ा क्लस्टर), जैसलमेर (राजस्थान) |
| भू-तापीय (Geothermal) | मणिकरण (पार्वती घाटी, HP), पूगा घाटी (लद्दाख) |
| ज्वारीय (Tidal) | खंभात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी (गुजरात) |
संसाधनों का संरक्षण
Conservation of Resources
खनिज संरक्षण क्यों?
- • खनिज बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं।
- • ये सीमित और अनवीकरणीय हैं।
- • खनन की गहराई बढ़ने से लागत बढ़ती है और गुणवत्ता घटती है।
सतत पोषणीय ऊर्जा (Sustainable Energy)
- • सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग।
- • बिजली की बचत (स्विच ऑफ करें)।
- • गैर-परंपरागत स्रोतों का अधिकतम उपयोग।