विकास Development
परीक्षा की तैयारी हेतु एक संपूर्ण और स्व-निहित शिक्षण मॉड्यूल
परिचय
विकास का एक बहुआयामी दृष्टिकोण
विकास की अवधारणा हमेशा से मानव आकांक्षाओं और इच्छाओं से जुड़ी रही है। इस अध्याय का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि विकास के कई पहलू हैं।
लोगों के लिए विकास के लक्ष्य भिन्न-भिन्न होते हैं, और उनमें आपसी विरोध भी हो सकता है। विकास को मापने के लिए आय के अतिरिक्त जीवन की गुणवत्ता और धारणीयता जैसे नए संकेतकों का उपयोग करना आवश्यक है।
अध्ययन के मुख्य विषय
संवृद्धि vs विकास
Growth vs Development
संवृद्धि (Growth)
- मात्रात्मक शब्द – केवल संख्याओं में वृद्धि
- आय या उत्पादन में वृद्धि पर केंद्रित
उदाहरण: कंपनी की संवृद्धि दर में 10% की वृद्धि हुई। GDP में 7% की वृद्धि।
विकास (Development)
- गुणात्मक अवधारणा – व्यापक दृष्टिकोण
- तकनीकी नवाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य शामिल
- सामाजिक न्याय पर बल
उदाहरण: शिक्षा स्तर में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच, लैंगिक समानता।
आर्थिक विकास और आर्थिक संवृद्धि को एक दूसरे का पूरक माना जाता है
विकास के लक्ष्य
विविधता और प्राथमिकताएँ
विभिन्न व्यक्तियों के लिए विकास का वादा
विकास का अर्थ विभिन्न व्यक्तियों के लिए अलग-अलग होता है। लोग ऐसी चीजें चाहते हैं जो उनके लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हों।
भूमिहीन ग्रामीण मज़दूर
- काम करने के अधिक दिन
- बेहतर मज़दूरी
- सामाजिक भेदभाव नहीं
- गाँव में नेता बनने का अवसर
पंजाब के समृद्ध किसान
- उपज के लिए ज़्यादा समर्थन मूल्य
- मेहनती और सस्ते मज़दूर
- उच्च पारिवारिक आय
- बच्चों को विदेश में बसाना
शहरी अमीर परिवार की लड़की
- भाई के समकक्ष आज़ादी
- अपने फ़ैसले खुद करना
- विदेश में पढ़ाई करना
आय और अन्य लक्ष्य
लोग ज़्यादा आय चाहते हैं (नियमित काम, बेहतर मज़दूरी, अच्छी कीमतें), लेकिन यह एकमात्र लक्ष्य नहीं है।
भौतिक लक्ष्य
- अधिक आय
- अधिक उपभोग
- भौतिक वस्तुएँ
अभौतिक लक्ष्य
- बराबरी का व्यवहार
- स्वतंत्रता
- सुरक्षा
- दूसरों से आदर
ये अभौतिक लक्ष्य कुछ मामलों में अधिक आय और अधिक उपभोग से भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बेहतर जीवन अभौतिक वस्तुओं (जैसे मित्रों की भूमिका) पर भी निर्भर करता है।
महत्वपूर्ण: जिन चीज़ों को आसानी से मापा नहीं जा सकता उनका जीवन में बहुत महत्व है। यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि जो मापा नहीं जा सकता, वह महत्व नहीं रखता।
विकास लक्ष्यों में भिन्नता और विरोध
विकास लक्ष्यों में विरोध: कई बार दो व्यक्ति या दो गुट ऐसी चीजें चाह सकते हैं जिनमें परस्पर विरोध हो सकता है।
व्यक्तिगत विरोध
एक लड़की अपने भाई के समान आज़ादी और अवसर चाहती है, जिसमें भाई द्वारा घर के काम में हाथ बँटाना भी शामिल है—जो शायद भाई को पसंद न हो।
सामाजिक विरोध
उद्योगपति अधिक बिजली पाने के लिए ज़्यादा बाँध चाहते हैं। इससे ज़मीन जलमग्न हो सकती है और आदिवासियों का जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
एक के लिए जो विकास है, वह दूसरे के लिए विनाशकारी भी हो सकता है।
विकास को मापना
आय और उसकी सीमाएँ
प्रतिव्यक्ति आय (Per Capita Income)
गणना सूत्र
(इसे औसत आय भी कहते हैं)
विश्व बैंक का वर्गीकरण (विश्व विकास रिपोर्ट 2019)
महत्वपूर्ण: विश्व बैंक की विश्व विकास रिपोर्ट देशों का वर्गीकरण करने के लिए प्रतिव्यक्ति आय को मुख्य मानदंड मानती है।
समृद्ध (उच्च आय) देश
US $49,300+
प्रति वर्ष या अधिक (2019)
विकसित देशभारत की स्थिति (2019)
US $6,700
प्रति वर्ष
मध्य आय वर्गनिम्न आय वाले देश
US $2,500-
प्रति वर्ष या कम (2019)
औसत आय की सीमा
औसत आय असमानताओं की जानकारी नहीं देती। यदि दो देशों की औसत आय समान है, लेकिन एक में आय का वितरण अत्यधिक असमान है (कुछ बहुत अमीर और ज़्यादातर गरीब), तो लोग उस देश में रहना पसंद करेंगे जहाँ आय अधिक समान रूप से वितरित है।
नवीनतम आँकड़े (2025)
विश्व बैंक वर्गीकरण (FY2026 – जुलाई 2025 से लागू)
भारत: उच्च-मध्य आय वर्ग (Upper-Middle Income)
- भारत की GDP (2025): $3.94 trillion (विश्व में 5वाँ स्थान)
- GDP Growth Rate: 8.2% (FY 2023-24)
- Per Capita Income (भारत): ₹2,05,579 (2025 अनुमानित)
आय के परे
सामाजिक संकेतक और सुविधाएँ
तीन राज्यों की तुलना (2018-19)
| राज्य | प्रतिव्यक्ति आय (₹) | शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000) | साक्षरता दर (%) | निवल उपस्थिति अनुपात (%) |
|---|---|---|---|---|
| हरियाणा | ₹2,36,147 | 30 | 82% | 61% |
| केरल | ₹2,04,105 | 7 | 96% | 77% |
| बिहार | ₹40,982 | 32 | 61.8% | 43% |
महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
शिशु मृत्यु दर (IMR)
किसी वर्ष में पैदा हुए 1,000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों का अनुपात।
साक्षरता दर
7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात।
निवल उपस्थिति अनुपात (NAR)
14-15 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु-वर्ग के कुल बच्चों के साथ प्रतिशत।
जीवन प्रत्याशा
व्यक्ति की जन्म के समय औसत आयु की संभावना। यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का संकेतक है।
निष्कर्ष: हरियाणा की प्रतिव्यक्ति आय केरल से अधिक है, लेकिन वह महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों (शिशु मृत्यु दर, साक्षरता) में केरल से बहुत पीछे है।
सार्वजनिक सुविधाओं का महत्व
जेब में रखा रुपया वे सभी वस्तुएँ और सेवाएँ नहीं खरीद सकता जिनकी बेहतर जीवन के लिए आवश्यकता है:
- पैसा प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं खरीद सकता
- पैसा बिना मिलावट की दवाएँ की गारंटी नहीं देता
- संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए पूरे समुदाय का कदम उठाना आवश्यक
केरल में शिशु मृत्यु दर कम क्यों? क्योंकि यहाँ स्वास्थ्य और शिक्षा की मौलिक सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (सा.वि.प्र.) ठीक प्रकार कार्य करती है।
नवीनतम राज्य आँकड़े (2025)
तीन राज्यों की तुलना (नवीनतम 2025)
| राज्य | प्रतिव्यक्ति आय (₹) | IMR | साक्षरता |
|---|---|---|---|
| हरियाणा | ₹2,96,685 | 26 | 84.8% |
| केरल | ₹2,28,000* | 5 | 96.2% |
| बिहार | ₹54,000* | 35* | 74.3% |
* अनुमानित आँकड़े (PLFS 2023-24 और SRS 2023 के आधार पर)
भारत IMR (2023): 25 प्रति 1000 (ऐतिहासिक निम्न)
भारत साक्षरता (2025): 77.7%
जीवन प्रत्याशा: 70.19 वर्ष
महिला साक्षरता: 70.3%
मानव विकास सूचकांक (HDI)
HDI क्या है और इसे कौन प्रकाशित करता है?
प्रकाशक
UNDP (United Nations Development Programme)
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम
प्रतिवर्ष Human Development Report में प्रकाशित
HDI Score Range
0.800+: Very High
0.700-0.799: High
0.550-0.699: Medium
0.550 से कम: Low
HDI के तीन मुख्य घटक (Components)
स्वास्थ्य
जीवन प्रत्याशा
(Life Expectancy at Birth)
शिक्षा
साक्षरता दर + नामांकन अनुपात
(Mean & Expected Years of Schooling)
जीवन स्तर
प्रतिव्यक्ति आय
(GNI per Capita PPP $)
पाठ्यपुस्तक के अनुसार HDI तुलना (परीक्षा हेतु)
| देश | HDI रैंक (पाठ्यपुस्तक) | विशेषता |
|---|---|---|
| श्रीलंका | 73 | छोटा देश, फिर भी भारत से आगे |
| भारत | 132 | Medium Human Development |
| म्यांमार | 149 | भारत से पीछे |
परीक्षा में पाठ्यपुस्तक के आँकड़े (भारत रैंक 132) ही लिखें
महत्वपूर्ण निष्कर्ष (पाठ्यपुस्तक से)
- श्रीलंका जैसा छोटा पड़ोसी देश हर विषय में भारत से आगे है
- नेपाल और बांग्लादेश की आय भारत से कम है, फिर भी जीवन प्रत्याशा में आगे हैं
- आय अकेले विकास का सही माप नहीं है – HDI अधिक व्यापक दृष्टिकोण देता है
नवीनतम HDI Report 2025 (UNDP)
भारत की वर्तमान स्थिति (2025)
130
HDI रैंक (193 देशों में)
सुधार: 133 → 130
0.685
HDI Score
+53% since 1990
72
जीवन प्रत्याशा (वर्ष)
1990 में 58.6 वर्ष
| देश | HDI रैंक 2025 | GNI/व्यक्ति ($) | जीवन प्रत्याशा |
|---|---|---|---|
| श्रीलंका | 78 | $12,578 | 76.4 |
| भूटान | 127 | – | – |
| भारत | 130 | $9,047 | 72.0 |
| बांग्लादेश | 130 | $6,683 | 72.4 |
| नेपाल | 145 | $4,883 | 68.4 |
| पाकिस्तान | 168 | $5,005 | 66.1 |
- विश्व प्रथम: Iceland (HDI: 0.972)
- भारत की श्रेणी: Medium Human Development (High के करीब – 0.700 threshold)
- असमानता का प्रभाव: 30.7% HDI loss due to inequality
- शिक्षा: Expected years of schooling: 13 वर्ष (1990 में 8.2 वर्ष)
पोषण स्तर और BMI आँकड़े
BMI (Body Mass Index): शरीर द्रव्यमान सूचकांक – 18.5 किग्रा/मी² से कम होने पर व्यक्ति अल्प-पोषित माना जाता है।
BMI कैलकुलेटर (भारतीय मानक)
वज़न और लंबाई दर्ज करें
भारतीय BMI मानक (Asian/Indian Standards)
< 18.5
अल्प-पोषित
18.5 – 22.9
सामान्य
23.0 – 24.9
अधिक वज़न
> 25
मोटापा
भारतीय मानक WHO मानक से भिन्न हैं (WHO: <18.5 अल्प-पोषित, 18.5-24.9 सामान्य, 25-29.9 अधिक वज़न, >30 मोटापा)
| राज्य | अल्प-पोषित पुरुष (%) | अल्प-पोषित महिलाएँ (%) |
|---|---|---|
| केरल | 8.5% | 10% |
| मध्य प्रदेश | 28% | 28% |
चिंताजनक तथ्य: भारत में लगभग आधे बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। सरकार को सुरक्षित पेयजल, आवासीय सुविधाएं, भोजन एवं पोषण जैसे मानव विकास के पक्षों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
नवीनतम पोषण आँकड़े (NFHS-5: 2019-21)
5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण
35.5%
Stunting (बौनापन)
विश्व औसत: 22%
19.3%
Wasting (दुर्बलता)
32.1%
Underweight (कम वज़न)
- Severe Acute Malnutrition: पिछले दो दशकों में लगातार बढ़ रहा है
- एनीमिया: 30% बच्चों में केवल एनीमिया की समस्या
- Triple Burden (SUA): 12% बच्चे Stunting + Underweight + Anaemia से ग्रस्त
उत्तर प्रदेश: ग्रामीण शैक्षिक असमानता
पुरुष साक्षरता
76%
ग्रामीण पुरुष साक्षरता दर
महिला साक्षरता
54%
ग्रामीण महिला साक्षरता दर
| आयु वर्ग (10-14 वर्ष) | लड़के NAR (%) | लड़कियाँ NAR (%) |
|---|---|---|
| ग्रामीण UP | 85% | 82% |
संवैधानिक लक्ष्य: भारत में स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी, कई राज्य 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के संवैधानिक लक्ष्य (जो 1960 तक पूरा होना था) के निकट भी नहीं पहुँच पाए हैं।
नवीनतम UP शिक्षा आँकड़े (2025)
उत्तर प्रदेश ग्रामीण साक्षरता (Census 2011 + PLFS Updates)
76.33%
ग्रामीण पुरुष
53.65%
ग्रामीण महिला
लैंगिक अंतर: 22.68 प्रतिशत अंक
- UP समग्र साक्षरता (2025): 78.2% (अनुमानित)
- शहरी साक्षरता: 75.14% (पुरुष 80.45%, महिला 69.22%)
- चुनौतियाँ: बाल विवाह, आर्थिक कठिनाइयाँ, लड़कियों की शिक्षा में बाधाएँ
विकास की धारणीयता
Sustainability of Development
धारणीयता क्या है?
धारणीयता: हम चाहेंगे कि विकास का वर्तमान स्तर बना रहे या कम से कम भावी पीढ़ी के लिए यह स्तर कायम रहे।
“हमने विश्व को अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं किया है—हमने इसे अपने बच्चों से उधार लिया है।
सतत विकास लक्ष्य (SDGs)
Sustainable Development Goals – 2030 Agenda
परिभाषा और पृष्ठभूमि
- अपनाया गया: 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा
- सदस्य देश: 193 देशों ने स्वीकृत किया
- लक्ष्य वर्ष: 2030 तक प्राप्त करना
- कुल लक्ष्य: 17 लक्ष्य और 169 उद्देश्य
- मूल सिद्धांत: “किसी को भी पीछे न छोड़ें” (Leave No One Behind)
इस अध्याय से संबंधित प्रमुख SDGs
अत्यधिक गरीबी को 2030 तक समाप्त करना
भुखमरी समाप्त करना और खाद्य सुरक्षा
सभी के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना
समावेशी और न्यायसंगत शिक्षा
महिलाओं और लड़कियों को सशक्त करना
सभी के लिए स्वच्छ पानी और स्वच्छता
देशों के बीच और भीतर असमानता कम करना
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई
स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा
SDGs और इस अध्याय का संबंध
- आय के परे विकास: SDGs केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय विकास पर भी बल देते हैं
- धारणीयता: भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण – यही SDGs का मूल उद्देश्य है
- समावेशी विकास: “किसी को भी पीछे न छोड़ें” – यह अध्याय में वर्णित विभिन्न लोगों के विकास लक्ष्यों से मेल खाता है
- HDI और SDGs: दोनों UNDP द्वारा विकसित और विकास के व्यापक दृष्टिकोण पर आधारित
भारत की SDG प्रगति (2025)
- SDG Index Score: 71/100 (Sustainable Development Report 2024)
- विश्व रैंक: 109/166 देशों में
- सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: SDG 13 (जलवायु कार्रवाई)
- सुधार की आवश्यकता: SDG 2 (भुखमरी), SDG 3 (स्वास्थ्य), SDG 5 (लैंगिक समानता)
उदाहरण 1: भूमिगत जल
देश के लगभग एक तिहाई भाग में भूमिगत जल भंडारों का अति-उपयोग हो रहा है।
- पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (कृषि समृद्ध क्षेत्र)
- पठारी क्षेत्र
- तेज़ी से विकसित हो रही शहरी बस्तियाँ
नवीकरणीय संसाधन: भूमिगत जल की पुनः पूर्ति प्रकृति (बरसात) द्वारा होती है। अति-उपयोग तब होता है जब प्रयोग पुनः पूर्ति से अधिक हो।
उदाहरण 2: कच्चा तेल
कच्चा तेल एक गैर-नवीकरणीय संसाधन है, जो कुछ वर्षों के प्रयोग के पश्चात् समाप्त हो जाते हैं।
संपूर्ण विश्व में कच्चे तेल के भंडार वर्तमान दर पर लगभग 50 वर्षों में समाप्त हो जाएँगे
भारत की स्थिति: भारत जैसे देश जिनके पास पर्याप्त भंडार नहीं है, वे इसके आयात पर निर्भर हैं।
केस स्टडी: आइवरी कोस्ट विषाक्त अपशिष्ट घटना
विकास के नाम पर विनाश का उदाहरण
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने आइवरी कोस्ट के अबिदजान शहर में जहरीले तरल अवशेष समुद्र में डाल दिए।
7
लोग मारे गए
26,000
लोगों का विषाक्तता के कारण इलाज
सबक: कुछ आर्थिक गतिविधियाँ एक क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकती हैं। पर्यावरण में गिरावट के परिणाम राष्ट्रीय और राज्य सीमाओं का ख्याल नहीं रखते। हम सबका भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है।
पर्यावरण संकट: नवीनतम आँकड़े (2025)
भूमिगत जल संकट (CGWB Report 2023)
11.23%
अति-दोहित ब्लॉक
(736 assessment units)
17%
Overexploited
241.34 bcm
वार्षिक निष्कर्षण
2080 तक भूजल हानि दर 3 गुना हो सकती है
भूजल निर्भरता:
- • सिंचाई का 62%
- • ग्रामीण जल आपूर्ति का 85%
- • शहरी जल आपूर्ति का 50%
कच्चा तेल (2025):
- • विश्व भंडार: ~47-50 वर्ष शेष
- • भारत आयात निर्भरता: 85%
- • वन क्षेत्र: 21.71% (लक्ष्य 33%)
अध्याय का सारांश
प्रमुख तथ्य और निष्कर्ष
विकास के लक्ष्य हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं और उनमें विरोध संभव है।
आय के अतिरिक्त, लोग स्वतंत्रता, सुरक्षा, आदर जैसे अभौतिक लक्ष्यों को भी महत्व देते हैं।
औसत आय का उपयोग किया जाता है, लेकिन यह असमान वितरण को छिपाती है।
केरल का उदाहरण: बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं की उपलब्धता आय से अधिक महत्वपूर्ण है।
HDI शिक्षा, स्वास्थ्य, और आय के आधार पर तुलना करता है। (भारत: 134, श्रीलंका: 78)
विकास की धारणीयता – संसाधनों का अति-उपयोग चिंता का विषय है।
विकास या प्रगति का प्रश्न हमेशा चलने वाला प्रश्न है और इस पर बहस जारी है।