वन एवं वन्य जीव संसाधन Forest and Wildlife Resources
जैव विविधता, संकटग्रस्त जातियाँ, संरक्षण अधिनियम, वनों के प्रकार और सामुदायिक प्रयासों का विस्तृत अध्ययन।
सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य: लेपचा लोकसंगीत
“नारक! मेरे ईश्वर, लेपचाओं की दुनिया में आप संगीत के जनक हैं…
ओह नारक! मेरे ईश्वर, मुझे स्वयं को आपको समर्पित करने दें, मुझे आप अपना संगीत झरनों, नदियों, पर्वतों, वनों, कीटों और जानवरों से ग्रहण करने दें…
मुझे आप अपना संगीत मधुर समीर से ग्रहण करने दें और इसे आपको ही समर्पित करने दें।”
– (स्रोत: प. बंगाल और सिक्किम का लेपचा लोकसंगीत)
भारत में वनस्पतिजात और प्राणिजात
Flora and Fauna in India
जैव विविधता की समृद्धि
यदि आप आसपास नज़र दौड़ाते हैं, तो पाएंगे कि कुछ ऐसे प्राणी और पौधे हैं जो आपके क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। वास्तव में भारत, जैव विविधता के संदर्भ में विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है।
वैश्विक हिस्सेदारी
यहाँ विश्व की सारी जैव उपजातियों की 8 प्रतिशत संख्या (लगभग 16 लाख) पाई जाती है।
खोज की संभावना
ये अभी खोजी जाने वाली उपजातियों से दो या तीन गुणा हैं। अभी बहुत सी प्रजातियों का पता लगाना बाकी है।
संकट (Crisis)
ये विविध वनस्पतिजात और प्राणिजात हमारे रोज़ के जीवन में इतने गुँथे हुए हैं कि हम इनकी कद्र नहीं करते। परंतु पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना के कारण पिछले कुछ समय से इन संसाधनों पर भारी दबाव बढ़ा है।
क्रियाकलाप (Activity)
अपने क्षेत्र में मानव और प्रकृति के समन्वयी संबंधों पर प्रचलित कहानियों के बारे में पता लगाएँ।
पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem): एक विस्तृत समझ
परिभाषा: पारिस्थितिकी तंत्र वह भौगोलिक क्षेत्र है जहाँ पेड़-पौधे, जानवर और अन्य जीवधारी, साथ ही वहाँ का मौसम और परिदृश्य, मिलकर जीवन का एक जाल (Web of Life) बनाते हैं। इसमें सजीव (Biotic) और निर्जीव (Abiotic) घटक एक-दूसरे से अंतर्क्रिया करते हैं।
मुख्य घटक (Key Components)
- जैविक (Biotic): पौधे (उत्पादक), जानवर (उपभोक्ता), कवक/बैक्टीरिया (अपघटक)।
- अजैविक (Abiotic): हवा, पानी, मिट्टी, धूप, तापमान, खनिज।
कार्य (Functions)
- ऊर्जा प्रवाह: सूर्य → पौधे → शाकाहारी → मांसाहारी।
- पोषण चक्र: मृत जीवों का अपघटन होकर मिट्टी में मिलना और पुनः पौधों द्वारा सोखा जाना।
वन (Forest)
स्थलीय तंत्र
तालाब (Pond)
जलीय तंत्र
मरुस्थल (Desert)
शुष्क तंत्र
वन ‘प्राथमिक उत्पादक’ हैं जिन पर दूसरे सभी जीव निर्भर हैं। हम भी इस तंत्र का मात्र एक हिस्सा हैं।
संरक्षण: आवश्यकता और कानून
Conservation: Needs and Laws
संकटग्रस्त प्रजाति: घड़ियाल (Gharial) Critically Endangered
घड़ियाल (Gavialis gangeticus) मगरमच्छ की एक विशेष प्रजाति है जो केवल स्वच्छ नदियों में पाई जाती है। 1970 के दशक में इनकी संख्या खतरनाक स्तर पर गिर गई थी।
- नदियों के किनारे रेत खनन (Sand Mining) से घोंसलों का विनाश।
- मछली पकड़ने के जालों में फंसना।
- नदी प्रदूषण और बांधों का निर्माण।
- 1975: मगरमच्छ संरक्षण परियोजना (UNDP के सहयोग से)।
- मुख्य आवास: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (MP, राजस्थान, UP)।
- कैप्टिव ब्रीडिंग (Captive Breeding) और पुनर्वास।
संरक्षण क्यों आवश्यक है? (Need for Conservation)
पारिस्थितिकी विविधता
यह हमारी पारिस्थितिकी विविधता (Ecological Diversity) को बनाए रखता है।
जीवन साध्य संसाधन
हमारे जीवन के लिए अनिवार्य संसाधन – जल, वायु और मृदा को बनाए रखता है।
जीन्स (Genetic) विविधता
बेहतर जनन (Breeding) के लिए वनस्पति और पशुओं में आनुवंशिक विविधता को संरक्षित करता है।
कानूनी ढांचा (Legal Framework)
भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम, 1972
1972 Act1960 और 1970 के दशकों में पर्यावरण संरक्षकों की माँग पर लागू किया गया।
मुख्य प्रावधान (Key Provisions)
- संकटग्रस्त जातियों के बचाव पर ज़ोर।
- शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध (Banning Hunting)।
- वन्यजीव आवासों को कानूनी रक्षण।
- जंगली जीवों के व्यापार पर रोक।
विशिष्ट संरक्षित परियोजनाएँ
केंद्रीय सरकार ने कई गंभीर खतरे में पड़े प्राणियों को रक्षण प्रदान किया:
*हाल ही में भारतीय हाथी, काला हिरण, चिंकारा, भारतीय गोडावन और हिम तेंदुओं को भी रक्षण दिया गया है।
भारत में संरक्षण का इतिहास
Timeline of Conservation Efforts
बिश्नोई आंदोलन (खेजड़ली)
1730 ई.अमृता देवी बिश्नोई और 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए बलिदान दिया।
भारतीय वन्यजीव बोर्ड का गठन
1952वन्यजीव संरक्षण नीति बनाने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में शीर्ष सलाहकार निकाय की स्थापना।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
1972भारत सरकार द्वारा वन्यजीवों के शिकार और व्यापार पर कानूनी प्रतिबंध।
प्रोजेक्ट टाइगर और चिपको आंदोलन
1973बाघों के संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ लॉन्च। उत्तराखंड में पेड़ों की रक्षा के लिए ‘चिपको आंदोलन’ की शुरुआत।
वन संरक्षण अधिनियम
1980वनों की कटाई को रोकने और गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम
1986भोपाल गैस त्रासदी के बाद, पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक व्यापक ‘छाता कानून’ (Umbrella Act) पारित।
संयुक्त वन प्रबंधन (JFM)
1988स्थानीय समुदायों को वन प्रबंधन में शामिल करने की शुरुआत (ओडिशा से प्रेरित)।
प्रोजेक्ट हाथी (Elephant)
1992हाथियों के आवास और गलियारों (Corridors) के संरक्षण के लिए लॉन्च।
जैव विविधता अधिनियम
2002जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग से होने वाले लाभों के समान वितरण के लिए।
वन अधिकार अधिनियम (FRA)
2006पारंपरिक वन निवासियों और आदिवासियों के अधिकारों को कानूनी मान्यता दी गई।
प्रोजेक्ट चीता (पुनर्स्थापना)
2022भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को नामीबिया से लाकर ‘कूनो नेशनल पार्क’ में फिर से बसाया गया।
बाघ परियोजना (Project Tiger)
1973 में शुभारंभ
स्रोत: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
संरक्षण की आवश्यकता क्यों?
20वीं शताब्दी के आरंभ में भारत में बाघों की अनुमानित संख्या 55,000 थी, जो 1973 तक घटकर मात्र 1,827 रह गई थी। बाघ एक प्रमुख प्रजाति है और खाद्य श्रृंखला में शीर्ष पर है।
मुख्य खतरे (Major Threats)
- व्यापार के लिए अवैध शिकार (Poaching)।
- आवासीय स्थलों का सिकुड़ना (Habitat Loss)।
- भोजन (जंगली उपजातियों) की कमी।
- एशियाई देशों में पारंपरिक औषधियों में हड्डियों का प्रयोग।
प्रोजेक्ट टाइगर: एक सफलता
‘प्रोजेक्ट टाइगर’ विश्व की बेहतरीन वन्य जीव परियोजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य केवल बाघों को बचाना नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े आकार की जैवजाति (Biotype) को बचाना भी है।
*भारत और नेपाल दुनिया के दो-तिहाई बाघों को आवास उपलब्ध कराते हैं।
भारत में प्रमुख बाघ रिज़र्व (Major Tiger Reserves)
कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान
बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान
सरिस्का वन्य जीव पशुविहार
मानस बाघ रिज़र्व
पेरियार बाघ रिज़र्व
वनों के प्रकार (प्रशासनिक वर्गीकरण)
Administrative Classification of Forests
1. आरक्षित वन (Reserved)
देश के आधे से अधिक (>50%) वन क्षेत्र। इमारती लकड़ी और अन्य वन पदार्थों के लिए स्थायी।
2. रक्षित वन (Protected)
कुल वन क्षेत्र का एक-तिहाई (1/3) हिस्सा। इनकी सुरक्षा अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए की जाती है।
3. अवर्गीकृत वन (Unclassed)
अन्य सभी प्रकार के वन और बंजर भूमि। सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में।
मध्य प्रदेश में स्थायी वनों के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्र है (कुल वन क्षेत्र का 75%)।
वनों का वर्गीकरण (वनस्पति आधारित)
Classification based on Vegetation Types
भारत में प्राकृतिक वनस्पति का वितरण
1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
क्षेत्र: पश्चिमी घाट, अंडमान-निकोबार, उत्तर-पूर्व भारत।
विशेषता: भारी वर्षा, पेड़ हमेशा हरे रहते हैं।
2. उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
क्षेत्र: भारत का सबसे बड़ा हिस्सा (MP, UP, बिहार)।
विशेषता: मानसून आधारित, गर्मियों में पत्ते गिरा देते हैं (जैसे साल, सागौन)।
3. कंटीले वन और झाड़ियाँ
क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात (शुष्क क्षेत्र)।
विशेषता: कम वर्षा, लंबी जड़ें, कांटेदार पौधे (बबूल, कैक्टस)।
4. पर्वतीय वन
क्षेत्र: हिमालय क्षेत्र।
विशेषता: ऊंचाई के साथ वनस्पति बदलती है (शंकुधारी वृक्ष: चीड़, देवदार)।
5. मैंग्रोव वन (ज्वारीय वन)
क्षेत्र: सुंदरबन (प. बंगाल), महानदी डेल्टा।
विशेषता: खारे पानी में उगने वाले, सुंदरी वृक्ष प्रसिद्ध हैं।
भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR)
Key Highlights from ISFR Reports
🇮🇳 भारत: मुख्य आँकड़े (ISFR 2023)
Latest Updateकुल वन और वृक्षावरण
25.17%
(8,27,357 वर्ग किमी)
कुल वनावरण (Forest Cover)
21.76%
कुल वृक्षावरण (Tree Cover)
3.41%
कुल वृद्धि (Increase)
1,445
वर्ग किमी (2021 से)
शीर्ष 3 राज्य (क्षेत्रफल में):
- मध्य प्रदेश (सर्वाधिक वन क्षेत्र)
- अरुणाचल प्रदेश
- छत्तीसगढ़
शीर्ष 3 राज्य (प्रतिशत में):
- मिजोरम (>85%)
- अरुणाचल प्रदेश
- मेघालय
🐪 राजस्थान: वन परिदृश्य (ISFR 2023)
Latest Dataकुल अभिलिखित वन क्षेत्र: 33,014 वर्ग कि.मी. (भौगोलिक क्षेत्रफल का 9.64%)
आरक्षित (Reserved)
12,198.71
वर्ग कि.मी.
रक्षित (Protected)
18,631.13
वर्ग कि.मी.
अवर्गीकृत (Unclassed)
2,184.16
वर्ग कि.मी.
वनावरण एवं वृक्षावरण (Forest & Tree Cover)
समुदाय और वन संरक्षण
Community and Conservation Efforts
पवित्र पेड़ों के झुरमुट
(Sacred Groves)
प्रकृति पूजा सदियों पुराना विश्वास है। कई वनों को ‘देवी-देवताओं के वन’ मानकर अछूता रखा गया है।
चिपको आंदोलन
हिमालय में वन कटाई रोकने में सफल। इसने दिखाया कि स्थानीय प्रजातियों का प्रयोग करके सामुदायिक वनीकरण सफल हो सकता है।
बीज बचाओ आंदोलन
टिहरी के किसानों (नवदान्य) ने दिखाया कि रासायनिक उर्वरकों के बिना विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य खेती संभव है।
अन्य सामुदायिक पहल:
-
सरिस्का बाघ रिज़र्व (राजस्थान): गाँव के लोग वन्य जीव रक्षण अधिनियम के तहत वहाँ हो रहे खनन कार्य को बंद करवाने के लिए संघर्षरत हैं।
-
अलवर (राजस्थान): 5 गाँवों ने 1,200 हेक्टेयर वन को ‘भैरोंदेव डाकव सोंचरी’ घोषित किया। यहाँ शिकार वर्जित है।
-
बिश्नोई गाँव: काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और मोर समुदाय का हिस्सा हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाता।
संयुक्त वन प्रबंधन (JFM)
शुरुआत: 1988 (ओडिशा का प्रस्ताव)।
इसमें वन विभाग और ग्रामीण क्षतिग्रस्त वनों के बचाव के लिए साथ मिलकर कार्य करते हैं।
“पेड़ एक विशेष असीमित दयालु और उदारपूर्ण जीवधारी हैं जो अपने सतत् पोषण के लिए कोई माँग नहीं करता और दानशीलतापूर्वक अपने जीवन की क्रियाओं को भेंट करता है। यह सभी की रक्षा करता है और स्वयं पर कुल्हाड़ी चलाने वाले विनाशक को भी छाया प्रदान करता है।”
— गौतम बुद्ध (487 ई.पू.)