जल संसाधन – संपूर्ण अध्ययन मॉड्यूल
कक्षा 10 – भूगोल (अध्याय 3)

जल संसाधन Water Resources

जल दुर्लभता, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ, जल प्रबंधन और वर्षा जल संग्रहण का विस्तृत अध्ययन।

जल: एक नवीकरण योग्य संसाधन

Availability and Renewable Nature

पृथ्वी का तीन-चौथाई (3/4) धरातल जल से ढका हुआ है, फिर भी हमारे उपयोग योग्य ‘अलवणीय जल’ (Freshwater) का अनुपात बहुत कम है। यह जल मुख्य रूप से सतही अपवाह और भौमजल (Groundwater) से प्राप्त होता है।

जलीय चक्र (Hydrological Cycle)

जल लगातार वाष्पीकरण, वर्षण और अपवाह की प्रक्रियाओं द्वारा गतिशील रहता है, जिससे इसका नवीकरण और पुनर्भरण सुनिश्चित होता है।

Earth's Water Distribution

चित्र: पृथ्वी पर जल का वितरण (स्रोतः USGS)

पृथ्वी पर जल का वितरण (Water Distribution)

1. जल उपलब्धता का ग्राफिकल निरूपण

महासागर (लवणीय) – 97.3% अलवणीय – 2.7%
97.3%
अलवणीय जल (Freshwater) का विभाजन:
बर्फ की चादरें और हिमनद (Glaciers) 70%
भौमजल (Groundwater) 30%
अन्य (सतही जल, नदियाँ आदि) < 1%

2. विस्तृत आँकड़े (Detailed Statistics)

जलाशय (Reservoir) कुल जल का प्रतिशत (%)
महासागर (Oceans) 97.3%
बर्फ छत्रक (Ice Caps) 2.0%
भूमिगत जल (Groundwater) 0.68%
झीलों का अलवणीय जल 0.009%
स्थलीय समुद्र एवं नमकीन झीलें 0.009%
वायुमंडल (Atmosphere) 0.0019%
नदियाँ (Rivers) 0.0001%

*स्रोत: UN World Water Development Report

भविष्यवाणी (Prediction – 2025)

ऐसी भविष्यवाणी की गई है कि 2025 तक 20 करोड़ लोग जल की घोर कमी झेलेंगे।

भारत और राजस्थान के जल संसाधन

Water Statistics: India vs Rajasthan

India Flag भारत के आंकड़े

विश्व जनसंख्या

18%

जल संसाधन

4%

वार्षिक वर्षा: ~4,000 BCM

उपयोग योग्य: 1,123 BCM

प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता (क्यूबिक मीटर):

1951 5177
2011 1545
2025 1341
राजस्थान (सबसे शुष्क राज्य)

विषम परिस्थिति (Disparity)

10.4% क्षेत्रफल
5.7% आबादी
1.16% कुल जल
सतही जल: 1.16%
भूमिगत जल: 1.70%
डार्क जोन (Dark Zone)

राजस्थान के अधिकतर ब्लॉक ‘डार्क जोन’ में हैं। इसका अर्थ है: निकासी > पुनर्भरण (Recharge).

3. तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Data)

विवरण (Parameter) विश्व (World) भारत (India) राजस्थान
जनसंख्या हिस्सा 100% 18% (दुनिया की) 5.7% (भारत की)
क्षेत्रफल हिस्सा 100% 2.4% (दुनिया का) 10.4% (भारत का)
जल संसाधन हिस्सा 100% 4% (दुनिया का) ~1.1% (भारत का)
औसत वर्षा ~1170 मिमी ~575 मिमी

जल दुर्लभता और इसके कारण

Water Scarcity: Causes and Impact

जल के विशाल भंडार और इसके नवीकरण योग्य गुणों के बावजूद, यदि हम ‘जल की कमी’ के बारे में सोचते हैं, तो हमें तत्काल कम वर्षा वाले क्षेत्रों या सूखाग्रस्त क्षेत्रों का ध्यान आता है। हम तुरंत राजस्थान के मरुस्थल और वहां पानी का मटका लिए दूर-दूर तक जाती महिलाओं की कल्पना करने लगते हैं।

परंतु, जल दुर्लभता के कारण केवल प्राकृतिक नहीं हैं। यह अतिशोषण (Over-exploitation), अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल के असमान वितरण का परिणाम है।

1. कृषि और बढ़ती जनसंख्या

बढ़ती जनसंख्या को न केवल पीने के लिए पानी चाहिए, बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी। हरित क्रांति के बाद, सूखा प्रतिरोधी फसलों और शुष्क कृषि तकनीकों के कारण सिंचित क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है।

परिणाम: किसान अपने निजी कुओं और नलकूपों से सिंचाई करके उत्पादन तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन इससे भौम जलस्तर (Groundwater Level) नीचे गिर रहा है, जो भविष्य में खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है।
2. औद्योगिकीकरण और शहरीकरण

स्वतंत्रता के बाद भारत में तेजी से औद्योगिकीकरण हुआ है। उद्योगों को चलाने के लिए न केवल पानी, बल्कि ऊर्जा की भी आवश्यकता होती है (जो काफी हद तक जल विद्युत से आती है)।

  • शहरों में बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली।
  • आवासीय समितियों (Housing Societies) में अपने स्वयं के नलकूप।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) द्वारा जल का भारी दोहन।
परिणाम: शहरों में जल संसाधनों का अतिशोषण हो रहा है और वे सूखते जा रहे हैं।
3. जल की गुणवत्ता में कमी (Qualitative Scarcity)

कई क्षेत्रों में लोगों की जरूरतों के लिए प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध हो सकता है, फिर भी वह क्षेत्र जल दुर्लभता का सामना कर सकता है। ऐसा जल की खराब गुणवत्ता के कारण होता है।

“भले ही पानी हो, लेकिन अगर वह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और कृषि उर्वरकों द्वारा प्रदूषित है, तो वह मानव उपयोग के लिए खतरनाक है।”

मुख्य प्रदूषक (Major Pollutants)

औद्योगिक कचरा

कीटनाशक

घरेलू अपशिष्ट

रसायन

सरकारी पहल एवं प्रबंधन

Government Initiatives & Integrated Management

प्रबंधन की आवश्यकता क्यों?

केवल जल की उपलब्धता ही काफी नहीं है, बल्कि उसका उचित प्रबंधन अनिवार्य है। जल संसाधनों के अतिशोषण और कुप्रबंधन से संसाधनों का ह्रास (Degradation) हो रहा है। यदि हम इनका संरक्षण नहीं करेंगे, तो पारिस्थितिकीय संकट (Ecological Crisis) उत्पन्न हो सकता है जिसका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।

स्वास्थ्य खतरों से बचाव प्रदूषित जल से होने वाली बीमारियों (हैजा, टाइफाइड) से समाज को बचाना।
खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करना खेती के लिए सिंचाई हेतु निरंतर जल आपूर्ति बनाए रखना।
आजीविका और उत्पादक क्रियाएँ कृषि और उद्योगों की निरंतरता के लिए जल अनिवार्य है।
प्राकृतिक पारितंत्र का बचाव नदियों और वनों को सूखने और प्रदूषण से बचाना (निम्नीकरण रोकना)।
जल जीवन मिशन (JJM)

भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

लक्ष्य: प्रत्येक ग्रामीण परिवार को लंबी अवधि के लिए नियमित रूप से नल का पानी।
सेवा स्तर: 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन (LPCD)।
अटल भूजल योजना (Atal Jal)

7 राज्यों (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, MP, महाराष्ट्र, राजस्थान, UP) के 80 जल संकट वाले जिलों में लागू।

Groundwater Recharge Structure

मुख्य पहलू: जल उपयोग के प्रति जनता के व्यवहार में परिवर्तन लाना।

सामुदायिक भागीदारी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

खेत में पानी की वास्तविक उपलब्धता बढ़ाना।

हर खेत को पानी: सुनिश्चित सिंचाई के तहत बुवाई क्षेत्र का विस्तार।
Per Drop More Crop: पानी की दक्षता में सुधार (ड्रिप/स्प्रिंकलर तकनीक)।

प्राचीन भारत में जलीय कृतियाँ

Hydraulic Structures in Ancient India

1st C.
श्रृंगवेरा (इलाहाबाद)

ईसा से एक शताब्दी पूर्व: गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित करने के लिए उत्कृष्ट जल संग्रहण तंत्र।

चंद्रगुप्त मौर्य का काल

बड़े स्तर पर बांध, झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण। (कलिंग, नागार्जुनकोंडा, बेन्नूर में भी साक्ष्य)।

11th
भोपाल झील

11वीं शताब्दी में निर्मित, अपने समय की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक।

14th
हौज खास (दिल्ली)

इल्तुतमिश ने सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल आपूर्ति के लिए एक विशिष्ट तालाब बनवाया।

बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएँ (बांध)

Multi-purpose River Projects & Integrated Water Management

बांध: परिभाषा और वर्गीकरण

बांध बहते जल को रोकने, दिशा देने या बहाव कम करने के लिए खड़ी की गई एक बाधा है, जो आमतौर पर जलाशय, झील या जलभरण बनाती है। ‘बांध’ का अर्थ संरचना की बजाय ‘जलाशय’ (Reservoir) से लिया जाता है।

संरचना/पदार्थ के आधार पर

लकड़ी के बांध, तटबंध बांध (Embankment) या पक्का बांध (Masonry)।

ऊँचाई के अनुसार

बड़े बांध, मुख्य बांध, नीचे बांध, मध्यम बांध और उच्च बांध।

“आधुनिक भारत के मंदिर”

स्वतंत्रता के बाद शुरू की गई बहुउद्देशीय परियोजनाओं को जवाहरलाल नेहरू ने ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा था।

कारण: उनका मानना था कि ये परियोजनाएं कृषि विकास, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगिकीकरण और नगरीय अर्थव्यवस्था का समन्वित विकास (Integrated Development) करेंगी।
इन्हें ‘बहुउद्देशीय’ क्यों कहते हैं? (Integrated Objectives)

विद्युत उत्पादन

सिंचाई

बाढ़ नियंत्रण

नौचालन (Navigation)

मछली पालन

मनोरंजन

घरेलू व औद्योगिक जल आपूर्ति

Hirakud Dam

हीराकुंड बांध (महानदी): जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण का समन्वय

भाखड़ा-नांगल परियोजना

नदी: सतलुज-ब्यास बेसिन

यह जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई दोनों कार्यों में समन्वित रूप से प्रयोग होती है।

हीराकुंड परियोजना

नदी: महानदी बेसिन (ओडिशा)

यह जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण (Flood Control) का समन्वय करती है।

सरदार सरोवर बांध (गुजरात)
नर्मदा नदी

यह भारत की एक बड़ी जल संसाधन परियोजना है जिसमें चार राज्य सम्मिलित हैं: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान। इसका मुख्य उद्देश्य सूखाग्रस्त और मरुस्थलीय भागों की प्यास बुझाना है।

गुजरात (लाभ)

  • • 15 जिले
  • • 3,112 गाँव
  • 18.45 लाख हेक्टेयर सिंचाई

राजस्थान (लाभ)

  • • बाड़मेर और जालौर जिले
  • 2,46,000 हेक्टेयर सिंचाई
  • • सूखा रोधी बनाना

महाराष्ट्र (लाभ)

  • • आदिवासी पहाड़ी इलाके
  • 37,500 हेक्टेयर भूमि

विरोध और आलोचनाएँ (Criticism of Dams)

  • प्राकृतिक बहाव में बाधा: तलछट जमाव (Sedimentation) बढ़ता है, जिससे नदी का तल चट्टानी हो जाता है।
  • जलीय जीवन: जीवों का प्रवास और अंडे देना अवरुद्ध हो जाता है।
  • विस्थापन: स्थानीय लोगों का बड़े स्तर पर विस्थापन और आजीविका की हानि।
  • बाढ़ नियंत्रण में विफलता: अत्यधिक वर्षा में बड़े बांध बाढ़ रोकने में असमर्थ होते हैं।
  • मृदा लवणीकरण: अत्यधिक सिंचाई से भूमि बंजर हो जाती है।
  • अंतर्राज्यीय विवाद: जल बंटवारे को लेकर राज्यों में झगड़े (उदा. कृष्णा-गोदावरी विवाद)।

भारत के प्रमुख बांध: एक नजर में

Additional Resource (अतिरिक्त जानकारी)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य और स्थान

बांध का नाम (Dam) नदी (River) राज्य (State) महत्वपूर्ण तथ्य (Key Fact)
टिहरी बांध भागीरथी उत्तराखंड भारत का सबसे ऊँचा बांध (260.5 मीटर)
भाखड़ा नांगल सतलुज हिमाचल प्रदेश / पंजाब भारत का सबसे बड़ा गुरुत्वीय बांध
हीराकुंड बांध महानदी ओडिशा विश्व का सबसे लंबा मिट्टी का बांध (25.8 किमी)
सरदार सरोवर नर्मदा गुजरात 4 राज्यों की संयुक्त परियोजना, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास
नागार्जुन सागर कृष्णा तेलंगाना / आंध्र प्रदेश दुनिया का सबसे बड़ा चिनाई (Masonry) वाला बांध
कोयना बांध कोयना महाराष्ट्र महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना
रिहंद बांध रिहंद उत्तर प्रदेश गोविंद बल्लभ पंत सागर (भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील)
मेट्टूर बांध कावेरी तमिलनाडु भारत के सबसे पुराने बांधों में से एक (1934)
इडुक्की बांध पेरियार केरल एशिया का सबसे बड़ा आर्च (Arch) बांध
तुंगभद्रा बांध तुंगभद्रा कर्नाटक दक्षिण भारत की एक प्रमुख बहुउद्देशीय परियोजना

वर्षा जल संग्रहण: एक व्यावहारिक विकल्प

Rainwater Harvesting: Traditional & Modern Practices

क्यों अपनाएं? बहुउद्देशीय परियोजनाओं (बांधों) के विवादों और पारिस्थितिकीय प्रभावों को देखते हुए, वर्षा जल संग्रहण समाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक तौर पर एक बेहतर विकल्प है। प्राचीन भारत में लोगों को वर्षा, भौम, नदी और बाढ़ जल संग्रहण का गहरा ज्ञान था।
Rooftop Rainwater Harvesting System Diagram

छत वर्षा जल संग्रहण तंत्र (टांका प्रणाली)

1. कुल/गुल (पश्चिमी हिमालय)

पहाड़ी क्षेत्रों में नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई वाहिकाएँ। यह अक्सर वृत्त्य ग्रामीण तालाब में खुलती हैं।

2. खादीन और जोहड़ (राजस्थान)

शुष्क क्षेत्रों (जैसे जैसलमेर) में खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए गड्ढे बनाए जाते थे ताकि मृदा को सिंचित (Moisturize) किया जा सके।

3. बाढ़ जल वाहिकाएँ (प. बंगाल)

बाढ़ के मैदानों में लोग अपने खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ के पानी को मोड़ने वाली वाहिकाएँ (Inundation Channels) बनाते थे।

टांका (Tankas) – बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर

राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में लगभग हर घर में पीने का पानी संग्रहित करने के लिए भूमिगत टैंक होते थे। यह मुख्य घर या आँगन में बने होते थे और ढलवाँ छतों से पाइप द्वारा जुड़े होते थे।

पालर पानी (Palar Pani): प्राकृतिक जल का शुद्धतम रूप। यह अगली वर्षा ऋतु तक संग्रहित किया जा सकता है, जो गर्मियों में अमृत समान होता है।
शीतलन प्रभाव (Cooling): टांके के साथ भूमिगत कमरे बनाए जाते थे क्योंकि जल स्रोत कमरों को ठंडा रखता है, जिससे भीषण गर्मी में राहत मिलती है।

*नोट: इंदिरा गांधी नहर आने के बाद से यह परंपरा कम हो रही है, हालांकि कुछ लोग अब भी टांके का स्वाद पसंद करते हैं।

सफलता की कहानियाँ (Case Studies)
गंडाथूर (कर्नाटक)

मैसूरु जिले का एक साधारण गाँव।

  • लगभग 200 घरों ने छत वर्षा जल संग्रहण अपनाया है।
  • संग्रहण दक्षता: 80%।
  • प्रति वर्ष लगभग 1,00,000 लीटर जल एकत्रित।
  • ‘वर्षा जल संपन्न’ गाँव की ख्याति।
शिलांग (मेघालय)

चेरापूंजी और मॉसिनराम (सर्वाधिक वर्षा) से मात्र 55 किमी दूर।

  • शहर पीने के पानी की भारी कमी झेलता है।
  • घरेलू जल मांग का 15-25% हिस्सा छत जल संग्रहण से पूरा होता है।
  • यह एक रोचक विरोधाभास है।
मेघालय: बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली

मेघालय में नदियों व झरनों के जल को बाँस के बने पाइपों द्वारा एकत्रित करके सिंचाई करने की 200 वर्ष पुरानी विधि आज भी प्रचलित है। यह गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के सिद्धांत पर कार्य करती है।

1. जल संग्रहण

पहाड़ी शिखरों पर स्थित सदानीरा झरनों की दिशा परिवर्तित करके पानी को बाँस के पाइपों में डाला जाता है।

2. परिवहन (Transportation)

लगभग 18 से 20 लीटर पानी को बाँस के पाइपों के जाल द्वारा सैकड़ों मीटर की दूरी तक ले जाया जाता है।

3. अंतिम चरण (Dripping)

पुराने पानी के बहाव को नियंत्रित करके अंत में 20 से 80 बूँद प्रति मिनट तक घटाकर पौधे की जड़ों पर छोड़ा जाता है।

Bamboo Drip Irrigation System

चित्र: बाँस के पाइपों का जटिल जाल

तमिलनाडु: भारत का पहला और एकमात्र राज्य जहाँ पूरे राज्य में हर घर में छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचा बनाना अनिवार्य कर दिया गया है और न करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

कक्षा 10 भूगोल – अध्याय 3: जल संसाधन

स्रोतः NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित विस्तृत अध्ययन नोट्स।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *