कृषि (Agriculture) – संपूर्ण अध्ययन नोट्स
कक्षा 10 – भूगोल (अध्याय 4)

कृषि (Agriculture) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़

भारत की दो-तिहाई जनसंख्या का भरण-पोषण, फ़सल के प्रकार, मुख्य फ़सलें और तकनीकी सुधारों का विस्तृत अध्ययन।

कृषि: एक दृष्टि में

Importance in Indian Economy

भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ (Backbone) है। यह न केवल देश की विशाल जनसंख्या के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) सुनिश्चित करती है, बल्कि विभिन्न उद्योगों (जैसे चीनी, कपड़ा, जूट) के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध कराती है।

~55-58%

जनसंख्या रोजगार (आजीविका)

~15-18%

GDP में योगदान (सकल घरेलू उत्पाद)

#1

दालें, जूट और दूध उत्पादन में

#2

चावल, गेहूँ, गन्ना, फल और सब्जियों में

वैश्विक बाजार और निर्यात

भारत कृषि उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। इससे देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

चाय (Tea) कॉफ़ी (Coffee) मसाले (Spices) बासमती चावल तंबाकू
औद्योगिक आधार

कई प्रमुख उद्योग पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं।
उदाहरण: सूती वस्त्र, चीनी मिलें, जूट उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing)।

कृषि के प्रकार

Detailed Classification

कृषि हमारे देश की प्राचीन आर्थिक क्रिया है। पिछले हजारों वर्षों में भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार खेती करने की विधियों में सार्थक परिवर्तन हुआ है। वर्तमान में भारत में निम्नलिखित मुख्य कृषि प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं:

1. प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Farming)

यह कृषि भारत के कुछ भागों में अभी भी की जाती है। यह भूमि के छोटे टुकड़ों पर की जाती है।

  • औजार: आदिम कृषि औजार जैसे लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी।
  • श्रम: यह परिवार अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है।
  • निर्भरता: यह पूरी तरह से मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर निर्भर करती है।
कर्तन दहन प्रणाली (Slash & Burn)

किसान जमीन के टुकड़े साफ करके, वनस्पति को जलाकर उस पर अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं। जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है, तो वे उस भूमि को छोड़ देते हैं और नई भूमि साफ करते हैं।

नोट: इस स्थानांतरण से प्रकृति द्वारा मिट्टी की उर्वरता पुनः बढ़ जाती है। चूँकि इसमें उर्वरक का प्रयोग नहीं होता, इसलिए उत्पादकता कम होती है।

2. गहन जीविका कृषि (Intensive Subsistence Farming)

यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।

मुख्य विशेषताएँ
  • श्रम-गहन खेती: इसमें अधिक मजदूरों और मेहनत की आवश्यकता होती है।
  • अधिक उत्पादन का प्रयास: अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है।
समस्या (Problems)

‘भू-स्वामित्व में विरासत के अधिकार’ के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है। किसान वैकल्पिक रोजगार न होने के कारण सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं, जिससे कृषि भूमि पर भारी दबाव है।

3. वाणिज्यिक कृषि (Commercial Farming)

इस प्रकार की कृषि का मुख्य उद्देश्य पैदावार को बाजार में बेचकर लाभ कमाना है। इसके मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों का प्रयोग है।

HYV बीज

अधिक पैदावार वाले

उर्वरक

रासायनिक खाद

कीटनाशक

फसल सुरक्षा

क्षेत्रीयता

चावल: पंजाब में वाणिज्यिक, ओडिशा में जीविका।

रोपण कृषि (Plantation Agriculture)

रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यिक खेती है।

  • एकल फसल: इसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एक ही फसल बोई जाती है।
  • पूँजी और श्रम: यह अत्यधिक पूँजी और प्रवासी श्रमिकों की सहायता से की जाती है।
  • उद्योग-कृषि संगम: यह कृषि और उद्योग के बीच एक अंतरापृष्ठ (Interface) है। सारा उत्पादन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है।
भारत में प्रमुख रोपण फसलें
चाय (असम, प. बंगाल) कॉफ़ी (कर्नाटक) रबड़ गन्ना केला

*परिवहन और संचार के साधन इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

‘कर्तन दहन प्रणाली’ के विविध नाम

झूम खेती के स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय नाम

महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
विश्व (International)
  • मैक्सिको / मध्य अमेरिका मिलपा (Milpa)
  • वेनेजुएला कोनुको (Conuco)
  • ब्राजील रोका (Roca)
  • मध्य अफ्रीका मसोले (Masole)
  • इंडोनेशिया लदांग (Ladang)
  • वियतनाम रे (Ray)
भारत (India)
उत्तर-पूर्वी राज्य झूम
मध्य प्रदेश बेबर / दहिया
आंध्र प्रदेश पोडु / पेंडा
ओडिशा पामाडाबी / कोमान
पश्चिमी घाट कुमारी
राजस्थान (द.पू) वालरे
हिमालय क्षेत्र खिल
झारखण्ड कुरुवा

शस्य प्रारूप (Cropping Pattern)

Rabi, Kharif and Zaid Seasons

भारत में भौतिक विविधताओं और संस्कृतियों की बहुलता के कारण कृषि पद्धतियों और शस्य प्रारूपों में भी विविधता पाई जाती है। भारत में मुख्य रूप से तीन शस्य ऋतुएँ हैं:

1

रबी (Rabi) – शीत ऋतु की फसलें

समयावधि: बुवाई: शीत ऋतु (अक्टूबर से दिसंबर)
कटाई: ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल से जून)

मुख्य फ़सलें: गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों।

प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश।

सफलता का कारक: शीत ऋतु में पश्चिमी शीतोष्ण चक्रवातों (Western Temperate Cyclones) से होने वाली वर्षा इन फसलों के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
2

खरीफ़ (Kharif) – मानसून की फसलें

समयावधि: बुवाई: मानसून के आगमन के साथ (जून-जुलाई)
कटाई: सितंबर-अक्टूबर

मुख्य फ़सलें: चावल (धान), मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर (तूर), मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन।

प्रमुख राज्य: असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र (कोंकण तटीय क्षेत्र)।

विशेष तथ्य: असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में धान की तीन फसलें बोई जाती हैं: ऑस, अमन और बोरो
3

जायद (Zaid) – ग्रीष्मकालीन फसलें

यह रबी और खरीफ़ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली अल्पकालिक फसलें हैं।

  • मुख्य फ़सलें: तरबूज़, खरबूज़े, खीरे, सब्जियाँ और चारे की फसलें।
नोट: गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है, इसलिए यह किसी एक विशेष ऋतु में नहीं गिना जाता।

मुख्य खाद्यान्न फ़सलें

Grains & Pulses

खरीफ़

चावल (Rice)

Rice Cultivation Map India
महत्व: भारत का अधिकांश लोगों का खाद्यान्न। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • जलवायु: उष्ण और आर्द्र। तापमान 25°C से ऊपर और वर्षा 100 सेमी से अधिक।
  • क्षेत्र: उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदान, तटीय क्षेत्र और डेल्टाई प्रदेश।
  • सिंचाई वाले क्षेत्र: कम वर्षा वाले क्षेत्रों जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में नहरों और नलकूपों की सहायता से उगाया जाता है।
रबी

गेहूँ (Wheat)

Wheat Growing Regions India
महत्व: भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फ़सल। यह उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भारत का मुख्य भोजन है।
  • जलवायु: उगाने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप। वर्षा 50-75 सेमी।
  • दो मुख्य क्षेत्र: (1) उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान (2) दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।
  • मुख्य राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान।
मोटे अनाज (Millets) और मक्का – पोषक तत्वों का भंडार
ज्वार (Jowar) #3 फसल

क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से तीसरी महत्वपूर्ण फ़सल। यह वर्षा पर निर्भर है और अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाई जाती है (सिंचाई की कम आवश्यकता)।

राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, म.प्र.

बाजरा (Bajra)

यह बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। यह शुष्क जलवायु को सहन कर सकता है।

राज्य: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा।

रागी (Ragi)

शुष्क प्रदेशों की फसल। यह लोहा, कैल्शियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों व भूसी (Roughage) से भरपूर है। लाल, काली, बलुआ, दोमट मिट्टी उपयुक्त है।

राज्य: कर्नाटक, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, झारखंड।

दालें (Pulses)

India: #1 Producer & Consumer

आहार में महत्व

भारत एक शाकाहारी प्रधान देश है, इसलिए दालें भोजन में प्रोटीन (Protein) का सबसे प्रमुख स्रोत हैं।

मुख्य किस्में
अरहर (तूर) उड़द मूँग मसूर मटर चना
Science Fact
फलीदार फसलें (Leguminous)

अरहर को छोड़कर, अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन (Nitrogen) लेकर भूमि की उर्वरता को पुनर्स्थापित करती हैं।

*अतः किसान मृदा की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने के लिए इन्हें ‘फसल आवर्तन’ (Crop Rotation) में बोते हैं।

प्रमुख उत्पादक राज्य

मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक। (ये शुष्क परिस्थितियों में भी उग सकती हैं)।

अन्य खाद्य फ़सलें (Other Food Crops)

Sugar, Oilseeds & Beverages

नकद फसल
गन्ना (Sugarcane)
उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय

“गन्ना एक भारी फसल है, जिसे बुवाई से लेकर कटाई तक काफी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।”

तापमान: 21°C – 27°C
वर्षा: 75 – 100 सेमी
  • उत्पादक: ब्राजील के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • उपयोग: चीनी, गुड़ (Jaggery), खांडसारी और शीरा (Molasses) बनाने में।
  • प्रमुख राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार।
तिलहन (Oilseeds)

भारत विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक (2018)। देश के कुल बोए गए क्षेत्र के 12% भाग पर विस्तृत।

मूँगफली (Groundnut) खरीफ

देश में कुल तिलहन उत्पादन का आधा भाग इसी से प्राप्त होता है।

प्रमुख राज्य: गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु।

सरसों (Mustard) रबी
तिल (Sesamum) उत्तर (खरीफ) / दक्षिण (रबी)
अरंडी (Castor) रबी और खरीफ
अन्य नारियल, सोयाबीन, बिनौला, अलसी, सूरजमुखी।
उपयोग: अधिकतर खाद्य तेल के रूप में। कुछ का उपयोग साबुन, प्रसाधन (Cosmetics) और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
चाय (Tea)
महत्वपूर्ण पेय पदार्थ

जलवायु: वर्ष भर कोष्ण, नम और पाला रहित जलवायु। वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें।

मृदा: ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र।

श्रम: यह एक श्रम-सघन उद्योग है (सस्ते व कुशल श्रम की आवश्यकता)। पत्तियाँ बागान में ही संसाधित होती हैं।

प्रमुख क्षेत्र: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी), तमिलनाडु, केरल।
कॉफ़ी (Coffee)
भारतीय गुणवत्ता
अरेबिका (Arabica) किस्म

यह किस्म शुरुआत में यमन से लाई गई थी। भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है।

  • इतिहास: इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से हुई।
  • वर्तमान क्षेत्र: आज भी इसकी खेती मुख्य रूप से नीलगिरि की पहाड़ियों के आस-पास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है।

बागवानी फसलें (Horticulture)

Fruits and Vegetables

वैश्विक स्थिति

सन् 2018 में भारत का फलों और सब्जियों के उत्पादन में विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान था। भारत उष्ण (Tropical) और शीतोष्ण (Temperate) दोनों ही प्रकार के फलों का एक प्रमुख उत्पादक है।

#2 Global Rank

प्रमुख फल और उनके उत्पादक क्षेत्र

आम (Mango)

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

संतरे (Orange)

मुख्य रूप से नागपुर और चेरापूँजी (मेघालय) के संतरे प्रसिद्ध हैं।

केले (Banana)

केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु।

लीची और अमरूद

उत्तर प्रदेश और बिहार। (बिहार की लीची विश्व प्रसिद्ध है)।

अनन्नास (Pineapple)

मेघालय (पूर्वोत्तर भारत की जलवायु इसके लिए उपयुक्त है)।

अंगूर (Grapes)

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र।

सेब, नाशपाती, खूबानी और अखरोट

ये शीतोष्ण (Temperate) फल मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में उगाए जाते हैं। इनकी विश्व भर में बहुत माँग है।

सब्जियां (Vegetables)

महत्वपूर्ण तथ्य:

भारत विश्व की लगभग 13 प्रतिशत सब्जियों का उत्पादन करता है। यह देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत का विश्व में मटर और फूलगोभी के उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रमुख उत्पादित सब्जियां:
मटर (Pea)
फूलगोभी (Cauliflower)
प्याज (Onion)
बंदगोभी (Cabbage)
टमाटर (Tomato)
बैंगन (Brinjal)
आलू (Potato) मुख्य सब्जी
13% Global Share
Variety of Vegetables in India

अखाद्य फ़सलें (Non-Food Crops)

Rubber, Fiber & Sericulture

रबड़ (Rubber)

रबड़ मुख्य रूप से भूमध्यरेखीय (Equatorial) क्षेत्र की फसल है, परंतु विशेष परिस्थितियों में इसे उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी उगाया जाता है। यह उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

वर्षा: 200 सेमी से अधिक
तापमान: 25°C से अधिक
जलवायु: नम और आर्द्र (Moist and Humid)

प्रमुख उत्पादक: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय की गारो पहाड़ियाँ।

रेशेदार फ़सलें (Fiber Crops)

भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फ़सलें हैं।

प्राकृतिक रेशे
1. कपास मिट्टी से प्राप्त
2. जूट मिट्टी से प्राप्त
3. सन (Hemp) मिट्टी से प्राप्त
4. प्राकृतिक रेशम कीड़े के कोकून से
रेशम उत्पादन (Sericulture)

रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम के कीड़ों का वाणिज्यिक पालन ‘सेरीकल्चर’ कहलाता है।

  • यह एकमात्र रेशेदार फसल है जो मिट्टी में नहीं उगती।
  • रेशम का कीड़ा मलबरी (Mulberry) अर्थात् शहतूत के पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है।
  • कोकून (Cocoon) से प्राकृतिक रेशम का धागा निकाला जाता है।
कपास (Cotton)
खरीफ़ फसल
वैश्विक स्थिति: भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है। चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (2017) है।
  • उपयोग: सूती कपड़ा उद्योग (Cotton Textile Industry) का मुख्य कच्चा माल।
  • मृदा: दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी (Black Soil) सबसे उपयुक्त।
  • अवधि: इसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं।
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
  • उच्च तापमान।
  • हल्की वर्षा या सिंचाई।
  • 210 पाला रहित दिन (Frost-free days)।
  • खिली धूप (Bright Sunshine) – पकने के समय।

प्रमुख राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, म.प्र., कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश।

जूट (Jute)
सुनहरा रेशा

“जूट को इसकी चमक और रंग के कारण ‘सुनहरा रेशा’ (Golden Fiber) कहा जाता है।”

भौगोलिक आवश्यकताएँ
  • मृदा: बाढ़ के मैदानों की जल निकास वाली उर्वरक मिट्टी, जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती है।
  • तापमान: फसल बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता।
उपयोग (Uses):
बोरियाँ चटाई रस्सी तंतु (Yarn) गलीचे दस्तकारी
बाजार की चुनौती

इसकी उच्च लागत के कारण, इसे कृत्रिम रेशे (Synthetic Fiber) और पैकिंग सामग्री, विशेषकर नायलॉन (Nylon) से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है।

प्रमुख उत्पादक राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और मेघालय।

प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार

Reforms since Independence

भारत में हजारों वर्षों से कृषि की जा रही है, परन्तु प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है तथा इसकी गति मंद हो जाती है।

“सिंचाई के साधनों का विकास होने के उपरांत भी देश के एक बहुत बड़े भाग में अभी भी किसान खेती-बाड़ी के लिए मानसून और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है। 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है।”

1. स्वतंत्रता के पश्चात् संस्थागत सुधार

स्वतंत्रता के ठीक बाद सरकार का मुख्य फोकस भूमि स्वामित्व और वितरण को सुधारना था। प्रथम पंचवर्षीय योजना का मुख्य लक्ष्य ‘भूमि सुधार’ ही था।

प्रमुख कदम:
  • जमींदारी प्रथा की समाप्ति: बिचौलियों का अंत करके किसानों को भूमि का मालिकाना हक देना।
  • चकबंदी (Consolidation): ‘विरासत के अधिकार’ के कारण भूमि टुकड़ों में बँटती जा रही थी, जिसकी चकबंदी करना अनिवार्य था।
  • सहकारिता (Cooperation): किसानों को एकजुट होकर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना।
चुनौती

भूमि सुधार के कानून तो बने, परन्तु इन्हें लागू करने में ढील की गई, जिससे अपेक्षित परिणाम तुरंत नहीं मिले।

2. तकनीकी सुधार (1960-70 का दशक)

इस दौर में भारत सरकार ने ‘पैकेज टेक्नोलॉजी’ पर आधारित कृषि सुधारों की शुरुआत की।

हरित क्रांति (Green Revolution)
  • जनक: विश्व में नॉर्मन बोरलॉग, भारत में एम. एस. स्वामीनाथन
  • मुख्य घटक: उच्च पैदावार वाले बीज (HYV Seeds), रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई।
  • फसलें: विशेष रूप से गेहूँ और चावल के उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि।
  • केंद्र क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश।
  • उपलब्धि: भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना और ‘बफर स्टॉक’ तैयार हुआ।
श्वेत क्रांति (Operation Flood)
  • उद्देश्य: दूध उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण विकास।
  • प्रणाली: सहकारी डेरी विकास (Cooperative Dairy)।
  • जनक: डॉ. वर्गीज कुरियन (Milkman of India)।
  • उदाहरण: अमूल (गुजरात) की सफलता ने इसे प्रेरित किया।
  • उपलब्धि: भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना।
*सीमा: हरित क्रांति का लाभ शुरू में देश के कुछ ही सिंचित क्षेत्रों तक सीमित रह गया था और इससे मृदा की उर्वरता में कमी (रसायनों के अति प्रयोग से) जैसी समस्याएँ भी आईं।
3. व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम (1980-90 का दशक)

इस चरण में संस्थागत और तकनीकी दोनों सुधारों का एक व्यापक मिश्रण प्रस्तुत किया गया:

फसल बीमा (Crop Insurance)

सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग और बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया गया ताकि किसान जोखिम से बच सकें।

वित्तीय सुविधाएँ

किसानों को कम दर पर ऋण सुविधाएँ प्रदान करने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई।

किसानों के लाभ के लिए विशेष योजनाएँ:
  • KCC (Kisan Credit Card): किसानों को आसानी से और जरूरत के समय ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना।
  • PAIS (Personal Accident Insurance Scheme): व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना।
  • सूचना प्रसारण: आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए मौसम की जानकारी के बुलेटिन और कृषि कार्यक्रम प्रसारित करना।
  • MSP (Minimum Support Price): किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए सरकार द्वारा ‘न्यूनतम सहायता मूल्य’ और कुछ महत्वपूर्ण फसलों के लाभदायक खरीद मूल्यों की घोषणा।

भूदान – ग्रामदान आंदोलन

विनोबा भावे का योगदान

रक्तहीन क्रांति
विनोबा भावे कौन थे?

महात्मा गांधी ने विनोबा भावे को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। उन्होंने गांधीजी के सत्याग्रह में सबसे निष्ठावान सत्याग्रही की तरह भाग लिया था। उनकी गांधी जी की ‘ग्राम स्वराज’ अवधारणा में भी गहरी आस्था थी। गांधीजी की शहादत के बाद, उनके संदेश को लोगों तक पहुँचाने के लिए विनोबा भावे ने लगभग पूरे देश की पदयात्रा की।

ऐतिहासिक घटना: पोचमपल्ली (आंध्र प्रदेश)

एक बार जब वे आंध्र प्रदेश के एक गाँव पोचमपल्ली में बोल रहे थे, तो कुछ भूमिहीन गरीब ग्रामीणों ने उनसे अपने आर्थिक भरण-पोषण के लिए कुछ भूमि माँगी। विनोबा भावे ने उनसे तुरंत कोई वायदा तो नहीं किया, परन्तु उनको आश्वासन दिया कि यदि वे सहकारी खेती करें तो वे भारत सरकार से बात करके उनके लिए जमीन मुहैया करवाएँगे।

“अचानक श्री राम चन्द्र रेड्डी उठ खड़े हुए और उन्होंने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की। इसे ‘भूदान’ के नाम से जाना गया।”

ग्रामदान (Gramdan) और प्रभाव

बाद में विनोबा भावे ने यात्राएँ कीं और अपना यह विचार पूरे भारत में फैलाया। कुछ जमींदारों ने, जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश भी की। इसे ‘ग्रामदान’ कहा गया।

(नोट: कुछ जमींदारों ने तो भूमि सीमा कानून (Land Ceiling Act) से बचने के लिए अपनी भूमि का एक हिस्सा दान किया था।)

इस आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ (Bloodless Revolution) का नाम दिया गया।

अभ्यास प्रश्न (Self Check)

NCERT Based Important Questions

1. बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) सही विकल्प चुनें

1. निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?

(क) स्थानांतरी कृषि
(ख) रोपण कृषि
(ग) बागवानी
(घ) गहन कृषि

उत्तर: (ख) रोपण कृषि

2. इनमें से कौन-सी रबी फसल है?

(क) चावल
(ख) मोटे अनाज
(ग) चना
(घ) कपास

उत्तर: (ग) चना

3. इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है?

(क) दालें
(ख) ज्वार-तिल
(ग) मोटे अनाज
(घ) तिल

उत्तर: (क) दालें

4. किस फसल को ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है?

(क) जूट
(ख) रेशम
(ग) कपास
(घ) रबड़

उत्तर: (क) जूट
2. लघु उत्तरीय प्रश्न (30 शब्दों में)

Q1. एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

चाय (Tea): यह एक प्रमुख पेय फसल है।
परिस्थितियाँ: उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, जीवांश युक्त गहरी मिट्टी, सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र और वर्ष भर समान रूप से वर्षा की बौछारें।

Q2. सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।

प्रमुख संस्थागत सुधार: 1. जोतों की चकबंदी (Consolidation)। 2. जमींदारी प्रथा की समाप्ति। 3. फसल बीमा (सूखा, बाढ़ के लिए)। 4. ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों की स्थापना (सस्ता ऋण)। 5. किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)।

3. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (120 शब्दों में)

Q1. चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ आवश्यक हैं:
1. तापमान: यह एक उष्णकटिबंधीय फसल है जिसे उच्च तापमान (25°C से ऊपर) की आवश्यकता होती है।
2. वर्षा: इसे अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों (जैसे पंजाब, हरियाणा) में इसे सिंचाई के द्वारा उगाया जाता है।
3. मृदा: जलोढ़ मिट्टी (Alluvial soil) जिसमें जल रोकने की क्षमता हो, इसके लिए सर्वोत्तम है। डेल्टाई और तटीय क्षेत्र इसके लिए सबसे उपयुक्त हैं।

Q2. भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण का क्या प्रभाव पड़ा?

वैश्वीकरण के तहत, विशेष रूप से 1990 के बाद, भारतीय किसानों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। चावल, कपास, रबर, चाय, कॉफी, जूट और मसालों का मुख्य उत्पादक होने के बावजूद, भारतीय कृषि विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ है क्योंकि उन देशों में कृषि को अत्यधिक सब्सिडी दी जाती है। भारतीय कृषि को सक्षम बनाने के लिए छोटे किसानों की स्थिति सुधारना अनिवार्य है।

त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision Points)
1. कृषि के प्रकार
  • झूम खेती (Jhuming): कर्तन दहन प्रणाली। पूर्वोत्तर भारत में प्रचलित।
  • गहन जीविका कृषि: उच्च जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में। श्रम-सघन।
  • रोपण कृषि: वाणिज्यिक उद्देश्य। एकल फसल (चाय, कॉफी)।
2. शस्य ऋतुएँ
  • रबी (शीत): गेहूँ, चना, सरसों। (पश्चिमी विक्षोभ सहायक)।
  • खरीफ़ (मानसून): चावल, मक्का, कपास, बाजरा।
  • जायद (ग्रीष्म): तरबूज, ककड़ी, चारा।
3. मुख्य भौगोलिक दशाएँ
  • चावल: >25°C तापमान, >100 सेमी वर्षा, जलोढ़ मिट्टी।
  • गेहूँ: शीत ऋतु, पकते समय खिली धूप, 50-75 सेमी वर्षा।
  • कपास: काली मिट्टी, उच्च तापमान, 210 पाला रहित दिन
  • गन्ना: गर्म और आर्द्र जलवायु, भारी शारीरिक श्रम।
4. स्मरणीय तथ्य
  • भूदान आंदोलन: विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया (रक्तहीन क्रांति)।
  • सुनहरा रेशा (Golden Fiber): जूट।
  • फलीदार फसलें (Leguminous): दालें (नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं)।
  • संस्थागत सुधार: चकबंदी, जमींदारी उन्मूलन, फसल बीमा।

कक्षा 10 भूगोल – अध्याय 4: कृषि

NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित परीक्षा उपयोगी नोट्स।

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