विनिर्माण उद्योग – संपूर्ण अध्ययन नोट्स
कक्षा 10 – भूगोल (अध्याय 6)

विनिर्माण उद्योग Manufacturing Industries

आर्थिक विकास की रीढ़: उद्योगों का वर्गीकरण, कृषि आधारित और खनिज आधारित उद्योग, और प्रदूषण नियंत्रण।

विनिर्माण: अर्थ और महत्व

Meaning and Importance

विनिर्माण क्या है? (What is Manufacturing?)

परिभाषा: कच्चे पदार्थ (Raw Material) को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण (Manufacturing) या ‘वस्तु निर्माण’ कहा जाता है।

मूल्य संवर्धन के उदाहरण:
लकड़ी कागज़ (अधिक मूल्यवान)
गन्ना चीनी
लौह अयस्क लोहा-इस्पात
बॉक्साइट एल्युमीनियम
रेशे कपड़े

द्वितीयक कार्य (Secondary Activities)

विनिर्माण उद्योग द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र में लगे व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत (Refined) वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं।

उदाहरण: स्टील कारखानों, कार, कपड़ा उद्योग, बेकरी तथा पेय पदार्थों से संबंधित उद्योगों में लगे श्रमिक इसी वर्ग में आते हैं।

*नोट: यह प्राथमिक क्षेत्र (कृषि/खनन) और तृतीयक क्षेत्र (सेवाओं) से अलग है, जहाँ लोग वस्तुएँ नहीं बनाते बल्कि सेवाएँ प्रदान करते हैं।

विनिर्माण का महत्व (आर्थिक विकास की रीढ़)

“किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है।”

– आर्थिक विकास का पैमाना

कृषि का आधुनिकीकरण

विनिर्माण उद्योग कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं। ये कृषि के लिए आवश्यक उपकरण जैसे उर्वरक, पंप, और मशीनें उपलब्ध कराते हैं।

रोज़गार और आय

ये द्वितीयक और तृतीयक सेवाओं में रोजगार उपलब्ध कराकर कृषि आय पर लोगों की भारी निर्भरता को कम करते हैं।

गरीबी और बेरोजगारी उन्मूलन

देश से बेरोजगारी और गरीबी हटाना औद्योगिक विकास की एक आवश्यक शर्त है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का यही मुख्य उद्देश्य था।

क्षेत्रीय असमानता में कमी

जनजातीय तथा पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना था।

विदेशी मुद्रा अर्जन

निर्मित वस्तुओं का निर्यात वाणिज्य व्यापार को बढ़ाता है और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा प्राप्त करने में सहायक होता है।

देश की समृद्धि

वे देश ही विकसित हैं जो कच्चे माल को विभिन्न तथा अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं।

कृषि और उद्योग: अटूट संबंध

कृषि तथा उद्योग एक दूसरे से पृथक नहीं हैं, बल्कि पूरक (Complementary) हैं।

  • कृषि आधारित उद्योगों ने कृषि पैदावार बढ़ाने को प्रोत्साहित किया है।
  • किसान उद्योगों पर निर्भर हैं: सिंचाई पंप, उर्वरक, कीटनाशक, प्लास्टिक पाइप, मशीनें और कृषि औजार।
  • उद्योगों ने कृषि उत्पादन प्रक्रिया को बहुत सक्षम बना दिया है।
वैश्वीकरण की चुनौती

आज की दुनिया में, हमारे उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम होने की आवश्यकता है।

“केवल आत्मनिर्भरता काफी नहीं है। हमारी वस्तुएँ गुणवत्ता में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की होनी चाहिए तभी हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।”

उद्योगों का वर्गीकरण

Detailed Classification of Industries

1
प्रयुक्त कच्चे माल के आधार पर (On the basis of Raw Materials)
कृषि आधारित (Agro Based)

कच्चे माल के रूप में कृषि उत्पादों (फसल/रेशे) का उपयोग किया जाता है।

सूती/ऊनी/रेशम वस्त्र रबड़ चीनी चाय/कॉफ़ी वनस्पति तेल
खनिज आधारित (Mineral Based)

खनिज व धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं।

लोहा तथा इस्पात सीमेंट एल्युमीनियम मशीन औजार पेट्रोरसायन
2
प्रमुख भूमिका के आधार पर (According to their Main Role)
आधारभूत उद्योग (Basic Industries)

जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं। ये अन्य उद्योगों के लिए मशीनें या कच्चा माल बनाते हैं।

लोहा-इस्पात तांबा/एल्युमीनियम प्रगलन
उपभोक्ता उद्योग (Consumer Industries)

जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं।

चीनी दंतमंजन पंखे कागज़
3
पूंजी निवेश के आधार पर (Based on Capital Investment)
लघु उद्योग (Small Scale Industry)

परिभाषा: इन उद्योगों को एक इकाई की परिसंपत्ति (Plant and Machinery) पर किए गए अधिकतम निवेश के आधार पर परिभाषित किया जाता है।

सीमा में परिवर्तन: यह निवेश सीमा समय-समय पर संशोधित की जाती है ताकि उद्योग आधुनिक तकनीक अपना सकें और प्रतिस्पर्धी बन सकें।

वर्तमान स्थिति (MSME वर्गीकरण):

अब ‘लघु’ (Small) उद्यम वे हैं जिनमें प्लांट और मशीनरी में निवेश ₹10 करोड़ से अधिक न हो और जिनका कारोबार (Turnover) ₹50 करोड़ तक हो। (नोट: पुरानी सीमा ₹1 करोड़ थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।)

विशेषता: ये उद्योग श्रम-सघन (Labor-intensive) होते हैं और छोटे निवेश में अधिक रोजगार प्रदान करते हैं।

4
स्वामित्व के आधार पर (Based on Ownership)
सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector)

ये उद्योग सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित होते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि जन-कल्याण और बुनियादी ढांचे का विकास करना होता है।

प्रमुख उदाहरण:
BHEL (भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स) SAIL (स्टील अथॉरिटी) NTPC
निजी क्षेत्र (Private Sector)

इनका स्वामित्व और संचालन एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है। इनका प्राथमिक उद्देश्य अधिकतम लाभ अर्जित करना होता है।

प्रमुख उदाहरण:
TISCO (टाटा स्टील) Bajaj Auto Dabur Reliance
संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector)

जब किसी उद्योग को राज्य सरकार और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर चलाते हैं। इसमें पूंजी निवेश, प्रबंधन, और जोखिमों को दोनों पक्षों द्वारा साझा किया जाता है।

प्रमुख उदाहरण:
Oil India Ltd (OIL) Maruti Udyog (पूर्व में)
सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sector)

इनका स्वामित्व कच्चे माल के उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं या श्रमिकों के हाथ में होता है। संसाधनों का कोष (Pool) संयुक्त होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन आनुपातिक होता है।

प्रमुख उदाहरण:
महाराष्ट्र चीनी उद्योग केरल नारियल उद्योग Amul (दुग्ध सहकारिता)
5
कच्चे/तैयार माल के भार के आधार पर (Based on Bulk/Weight)
भारी उद्योग (Heavy Industries)
  • परिभाषा: वे उद्योग जिनमें भारी और अधिक स्थान घेरने वाले कच्चे माल का प्रयोग होता है और तैयार माल भी भारी होता है।
  • परिवहन लागत: इनके परिवहन की लागत बहुत अधिक होती है।
  • स्थान: इन्हें प्रायः कच्चे माल के स्रोतों (जैसे कोयला/लौह अयस्क खदानों) के निकट स्थापित किया जाता है।
लोहा तथा इस्पात तांबा प्रगलन
हल्के उद्योग (Light Industries)
  • परिभाषा: वे उद्योग जो कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं।
  • विशेषता: इनमें बिजली की खपत अक्सर कम होती है और ये कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं (Footloose industries)।
  • श्रम: इनमें अक्सर महिला श्रमिकों की भागीदारी अधिक देखी जाती है (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स में)।
विद्युतीय उद्योग (पंखे, सिलाई मशीन) खिलौना उद्योग

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME)

India’s Growth Engine

MSME क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘विकास इंजन’ माना जाता है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, निर्यात और औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संशोधित वर्गीकरण (Revised Classification)
उद्यम का प्रकार निवेश (Investment) कारोबार (Turnover)
सूक्ष्म (Micro) ₹2.5 करोड़ तक ₹10 करोड़ तक
लघु (Small) ₹25 करोड़ तक ₹100 करोड़ तक
मध्यम (Medium) ₹125 करोड़ तक ₹500 करोड़ तक

*नई सीमाएँ (2025 अधिसूचना के अनुसार प्रभावी)

~30%

GDP में योगदान

~45%

कुल निर्यात में हिस्सा

~11 करोड़+

रोज़गार (Employment)

महत्व (Significance)
  • श्रम-सघन (Labor Intensive): कृषि के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र।
  • कम पूंजी: कम निवेश में अधिक उत्पादन और रोजगार।
  • संतुलित विकास: ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों का विकेंद्रीकरण करके क्षेत्रीय असमानताओं को कम करता है।
  • पूरक भूमिका: बड़े उद्योगों को सहायक पुर्जे और कच्चा माल सप्लाई करता है।

कृषि आधारित उद्योग

Agro-Based Industries

परिभाषा

वे उद्योग जो कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर आधारित हैं। (उदाहरण: सूती वस्त्र, पटसन, रेशम, ऊनी वस्त्र, चीनी, वनस्पति तेल)

वस्त्र उद्योग (Textile Industry)

भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

अद्वितीय विशेषता (Unique Feature):

यह देश का अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।

वस्त्र उद्योग में मूल्य संवर्धन (Value Addition)
रेशा उत्पादन
(Fibre Prod.)
कच्चा रेशा
(Raw Fibre)
धुनाई/कताई
(Spinning)
सूत
(Yarn)
बुनाई
(Weaving)
कपड़ा
(Fabric)
रंगाई
(Dyeing)
वस्त्र
(Garments)
वस्त्र निर्माण
(Garment Mfg)
सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textiles)
1854: मुंबई (प्रथम सफल मिल)
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य & प्रभाव
  • प्राचीन काल: हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई।
  • औपनिवेशिक काल: इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से प्रतिस्पर्धा न कर पाने के कारण हानि हुई।
  • प्रथम विश्व युद्ध: इंग्लैंड की व्यस्तता के कारण भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिला।
स्थानीयकरण के कारक (Localization)

आरंभ में महाराष्ट्र और गुजरात तक सीमित था।

कपास की उपलब्धता बाज़ार परिवहन/पत्तन नमीयुक्त जलवायु
India Textile Industry Map
मानचित्र: भारत में वस्त्र उद्योग (Textile Industry Distribution)
कताई (Spinning) बनाम बुनाई (Weaving)
कताई (Spinning) बुनाई (Weaving)
केंद्रित (Concentrated): महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु। विकेन्द्रीकृत (Decentralized): हथकरघा, विद्युत्करघा, मिलें।
उत्पादन विश्व स्तर का है। बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला है (उच्च स्तरीय धागे का प्रयोग कम)।
खादी का महत्व: यह कुटीर उद्योग के रूप में बुनकरों को उनके घरों में बड़े पैमाने पर रोज़गार प्रदान करती है।
पटसन उद्योग (Jute Industry)
1855: रिशरा (कोलकाता)
भारत: सबसे बड़ा उत्पादक
दूसरा बड़ा निर्यातक (बांग्लादेश के बाद)
हुगली नदी तट पर केंद्रीकरण के कारण (West Bengal)
  • पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता।
  • सस्ता जल परिवहन (परिवहन जाल)।
  • कच्चे पटसन को संसाधित करने के लिए प्रचुर जल
  • सस्ता श्रमिक (पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, यूपी से)।
  • कोलकाता: बैंकिंग, बीमा और पत्तन सुविधाएँ।
विभाजन का प्रभाव (1947): मिलें भारत में रहीं, लेकिन 3/4 जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में चले गए।
चीनी उद्योग (Sugar Industry)
#2 चीनी, #1 गुड़/खांडसारी
विशेषताएँ और चुनौतियाँ
  • मौसमी (Seasonal): सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त।
  • भारी कच्चा माल: ढुलाई में सुक्रोस की मात्रा घट जाती है (Weight Losing)।
  • केंद्रीकरण: 60% मिलें यूपी और बिहार में।
दक्षिण/पश्चिम (महाराष्ट्र) में वृद्धि के कारण
  • गन्ने में अधिक सुक्रोस की मात्रा।
  • ठंडी जलवायु (पेराई का लंबा सत्र)।
  • सहकारी समितियों की सफलता।
Exam Corner: Quick Revision
महत्वपूर्ण कीवर्ड्स (Keywords):

आत्मनिर्भर, नमीयुक्त जलवायु, 1854 मुंबई (कपास), रिशरा 1855 (जूट), हुगली नदी, मौसमी उद्योग, सुक्रोस हानि, सहकारी क्षेत्र।

संभावित प्रश्न (Q&A):
  • Q. सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के कारक?
    A. कपास उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तन, श्रम, नमीयुक्त जलवायु।
  • Q. भारत में बुनाई की गुणवत्ता कम क्यों है?
    A. उच्च स्तरीय धागे का निर्यात होता है, घरेलू उपयोग कम है।

खनिज आधारित उद्योग

Mineral Based Industries

परिभाषा

वे उद्योग जो खनिज व धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं।

लोहा तथा इस्पात उद्योग (Iron & Steel Industry)
मुख्य अवधारणाएँ
  • आधारभूत उद्योग (Basic Industry): अन्य सभी भारी/हल्के उद्योग इसकी मशीनरी पर निर्भर हैं।
  • विकास का पैमाना: इस्पात का उत्पादन और खपत देश के विकास का सूचक है।
  • भारी उद्योग (Heavy Industry): कच्चा और तैयार माल दोनों भारी/स्थूल होते हैं (अधिक परिवहन लागत)।
कच्चे माल का अनुपात (Ratio of Raw Materials)
4
लौह-अयस्क
:
2
कोकिंग कोयला
:
1
चूना पत्थर

*इस्पात को कठोर बनाने के लिए मैंगनीज़ (Manganese) की भी आवश्यकता होती है।

स्थानीयकरण (Concentration)

अधिकांश उद्योग छोटा नागपुर पठार क्षेत्र में स्थित हैं।

अनुकूल परिस्थितियाँ (Causes):
  • लौह अयस्क की कम लागत।
  • उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता।
  • सस्ते श्रमिक।
  • स्थानीय बाज़ार में मांग की विशाल संभाव्यता।
उपयोग (Uses)
इंजीनियरिंग सामान निर्माण सामग्री रक्षा उपकरण चिकित्सा उपभोक्ता वस्तुएँ
Iron and Steel Plants Map
मानचित्र: भारत में लोहा तथा इस्पात संयंत्र (Iron and Steel Plants)
इस्पात निर्माण की प्रक्रिया (Process of Manufacture of Steel)
कच्चे माल का कारखाने तक परिवहन
(Transport of raw material to plant)
झोंका भट्टी
(Blast Furnace)
  • लौह अयस्क गलाया जाता है (Iron ore melted)
  • चूना पत्थर (फ्लक्स) मिलाया जाता है
  • धातुमल (Slag) हटाया जाता है
  • कोक का दहन अयस्क को गर्म करने के लिए
ढलवाँ लोहा
(Pig Iron)

गलित लोहा साँचे में डाला जाता है (Pigs)

इस्पात निर्माण
(Steel Making)

ढलवाँ लोहे का पुनः गलना/शुद्धिकरण। अशुद्धियों का ऑक्सीकरण।

+ मैंगनीज़, निकल, क्रोमियम मिलाना

धातु को आकार देना
(Shaping Metal)

रोलिंग (Rolling), प्रेसिंग (Pressing), ढलाई (Casting), गढ़ाई (Forging)

ऐल्युमिनियम प्रगलन (Aluminium Smelting)
दूसरा महत्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग
विशेषताएँ (Properties)
हल्का
जंग अवरोधी
ऊष्मा सुचालक
लचीला
उपयोग & कच्चा माल
  • उपयोग: हवाई जहाज़, बर्तन, तार। (इस्पात/ताँबा/जस्ता/सीसा का विकल्प)।
  • कच्चा माल: बॉक्साइट (भारी, गहरे लाल रंग की चट्टान)।
स्थापना की 2 महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ (Key Requirements)
1ऊर्जा की नियमित पूर्ति
2कम कीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता
एल्युमीनियम उद्योग में विनिर्माण की प्रक्रिया
(Process of Manufacturing in Aluminium Industry)
Input 4-6 टन बॉक्साइट
Process 2 टन एल्युमिना
Output 1 टन एल्युमीनियम
1
बॉक्साइट (Bauxite)

कच्चा माल (Raw Material)

बॉक्साइट खान
(Bauxite Quarry)
परिवहन (Transport)
2
एल्युमिना (Alumina)

प्रसंस्करण (Processing)

एल्युमिना रिफाइनरी
(Refinery)

बॉक्साइट दलन और एल्युमिना का घुलना

प्रगालक स्थल तक अयस्क
पेट्रोलियम कोक (Refinery)
कोयला खान से पिच (Pitch)
3
प्रगालक (Smelter)

अंतिम उत्पाद (Final Product)

एल्युमीनियम प्रगालक (Aluminium Smelter)
क्रायोलाइट (इलेक्ट्रोलाइट)
18,600 Kwh/टन
एल्युमीनियम

(NCERT) ऐल्युमिनियम निर्माण प्रक्रिया दर्शाता है। संयंत्र: ओडिशा, प. बंगाल, केरल, यूपी, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तमिलनाडु।

Exam Corner: Quick Revision
महत्वपूर्ण कीवर्ड्स (Keywords):

4:2:1 अनुपात, मैंगनीज़, छोटा नागपुर पठार, बॉक्साइट, दूसरा धातु शोधन उद्योग, जंग अवरोधी, आधारभूत उद्योग।

संभावित प्रश्न (Q&A):
  • Q. लोहा-इस्पात उद्योग के कच्चे माल का अनुपात?
    A. लौह-अयस्क : कोकिंग कोयला : चूना पत्थर = 4:2:1।
  • Q. ऐल्युमिनियम प्रगलन की स्थापना की शर्तें?
    A. नियमित ऊर्जा और सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता।
  • Q. ऐल्युमिनियम उद्योग का कच्चा माल?
    A. बॉक्साइट।

अन्य प्रमुख उद्योग

Other Key Industries

रसायन उद्योग (Chemical Industry)

GDP: 3% एशिया: 3rd, विश्व: 12th

यह उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें लघु तथा बृहत् दोनों प्रकार की इकाइयाँ शामिल हैं। इसकी एक अनूठी विशेषता है – रसायन उद्योग स्वयं का एक बड़ा उपभोक्ता भी है।

1. अकार्बनिक रसायन (Inorganic)
  • सल्फ्यूरिक अम्ल: उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन।
  • सोडा ऐश: काँच, साबुन, शोधक (Detergent), कागज।
  • कास्टिक सोडा & नाइट्रिक अम्ल: विभिन्न औद्योगिक उपयोग।
2. कार्बनिक रसायन (Organic)
  • पेट्रोरसायन (Petrochemicals): कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक, दवाइयां, रंजक पदार्थ।
  • स्थानीयकरण: ये तेल शोधन शालाओं (Refineries) या पेट्रोरसायन संयंत्रों के निकट स्थापित होते हैं।

उर्वरक उद्योग (Fertilizer Industry)

हरित क्रांति का आधार
मुख्य उत्पाद & पोषक तत्व
  • नाइट्रोजन युक्त (यूरिया): भारत विश्व में तीसरा बड़ा उत्पादक।
  • मिश्रित उर्वरक (DAP): नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश।
  • पोटाश की स्थिति: पूर्णतः आयात किया जाता है क्योंकि भारत में इसके भंडार नहीं हैं।
प्रमुख उत्पादक राज्य (50% उत्पादन)
गुजरात तमिलनाडु उत्तर प्रदेश पंजाब केरल

अन्य: आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, असम, प. बंगाल, गोवा, दिल्ली, म.प्र., कर्नाटक।

सीमेंट उद्योग (Cement Industry)

प्रथम: 1904 (चेन्नई)

घर, कारखाने, पुल, सड़कें, हवाई अड्डे, बाँध निर्माण के लिए अनिवार्य। स्वतंत्रता के बाद इसका प्रसार हुआ।

भारी कच्चा माल (Raw Materials):
  • चूना पत्थर (Limestone)
  • सिलिका (Silica)
  • जिप्सम (Gypsum)
  • ऊर्जा: कोयला और विद्युत।
स्थानीयकरण (Localization):

गुजरात में कई इकाइयाँ हैं।

कारण: यहाँ से खाड़ी देशों (Gulf Countries) के बाज़ार की उपलब्धता है।

मोटरगाड़ी उद्योग (Automobile Industry)

उत्पाद & विकास
  • उत्पाद: ट्रक, बसें, कारें, मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया और बहुउपयोगी वाहन।
  • विकास (Cause-Effect): उदारीकरण (Liberalization) के पश्चात् नए और आधुनिक मॉडलों की मांग बढ़ी। इससे विशेषकर कार और दोपहिया वाहनों में अपार वृद्धि हुई।
केंद्रीकरण (Centers)

दिल्ली, गुड़गाँव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर, बेंगलूरु।

सूचना प्रौद्योगिकी (IT)

इलेक्ट्रॉनिक राजधानी: बेंगलूरु
  • उत्पाद (Scope): ट्रांजिस्टर से लेकर टीवी, टेलीफोन, सेल्युलर टेलीकॉम, राडार, कंप्यूटर और दूरसंचार उपकरण।
  • सफलता का कारण: हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर का निरंतर विकास।
महत्वपूर्ण केंद्र

सर्वाधिक संकेंद्रण: बेंगलूरु, नोएडा, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे।
अन्य: कोलकाता, लखनऊ, कोयंबटूर।

Software Technology Parks Map
मानचित्र: भारत के प्रमुख सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स (Software Technology Parks)
Exam Corner: Quick Revision
महत्वपूर्ण कीवर्ड्स (Keywords):

D.A.P., यूरिया, पोटाश (आयातित), हरित क्रांति, 1904 चेन्नई, चूना पत्थर, सिलिका, उदारीकरण, तिपहिया, इलेक्ट्रॉनिक राजधानी (बेंगलूरु), हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर।

संभावित प्रश्न (Q&A):
  • Q. उर्वरक उद्योग में पोटाश को क्यों आयात किया जाता है?
    A. भारत में पोटाश या पोटाशियम यौगिकों के भंडार नहीं हैं।
  • Q. सीमेंट उद्योग के 3 मुख्य कच्चे माल?
    A. चूना पत्थर, सिलिका और जिप्सम।

कोर उद्योग

Eight Core Industries

कोर उद्योग (Core Industries) वे मुख्य उद्योग हैं जिनका अर्थव्यवस्था पर गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) पड़ता है। भारत में 8 प्रमुख कोर उद्योग हैं।

8 मुख्य उद्योग
  • बिजली (Electricity)
  • स्टील (Steel)
  • रिफाइनरी उत्पाद
  • कच्चा तेल (Crude Oil)
  • कोयला (Coal)
  • सीमेंट (Cement)
  • प्राकृतिक गैस
  • उर्वरक (Fertilizers)
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP)

इन आठ उद्योगों का संयुक्त भार (Weightage) IIP में लगभग 40.27% है।

प्रकाशक: NSO (सांख्यिकी मंत्रालय)
आवृत्ति: मासिक (Monthly)
आधार वर्ष: 2011-2012

औद्योगिक प्रदूषण और रोकथाम

Industrial Pollution & Control Measures

A

प्रदूषण के प्रकार (Types of Pollution)

उद्योग मुख्य रूप से चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं। ताप विद्युत्गृह (Thermal Power Plants) भी इसका एक बड़ा कारण हैं।

वायु प्रदूषण (Air Pollution)

गैसे व कण (Gases & Particulates)
  • गैसें: सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड।
  • कणनुमा पदार्थ: धूलि, स्प्रे, कुहासा, धुआँ।
  • प्रभाव: मानव स्वास्थ्य, पशुओं और इमारतों पर।

जल प्रदूषण (Water Pollution)

अपशिष्ट बहाव (Waste Discharge)
  • कारण: कार्बनिक/अकार्बनिक अपशिष्ट का नदी में निकास।
  • प्रदूषक: रंग, अम्ल, भारी धातुएँ (सीसा, पारा)।
  • मुख्य कचरा: फ्लाई ऐश, फॉस्फो-जिप्सम, स्लैग।

तापीय प्रदूषण (Thermal)

ऊष्मा व विकिरण (Heat & Radiation)
  • स्रोत: गर्म जल को बिना ठंडा किए नदियों में छोड़ना।
  • खतरा: परमाणु कचरे से कैंसर, जन्मजात विकार।
  • मृदा व जल का गहरा संबंध है (रिसाव से भूजल प्रदूषण)।

ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

अवांछित शोर (Unwanted Sound)
  • स्रोत: जनरेटर, ड्रिल, मशीनरी, आरा मशीनें।
  • प्रभाव: खिन्नता, उच्च रक्तचाप, श्रवण बाधिता।
  • मानसिक: तनाव और चिंता का प्रमुख कारण।
B

पर्यावरणीय निम्नीकरण की रोकथाम (Prevention)

गंभीर तथ्य:

कारखानों द्वारा निष्कासित एक लीटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुना स्वच्छ जल दूषित होता है। सतत पोषणीय विकास (Sustainable Development) समय की मांग है।

जल प्रदूषण नियंत्रण (Water Treatment)

उपाय (Measures)
  • जल का न्यूनतम उपयोग & पुनर्चक्रण
  • वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)
  • अपशिष्ट जल का शोधन (Treatment)
शोधन के चरण (Stages of Treatment)
1. प्राथमिक (Primary) यांत्रिक: छँटाई, टुकड़े करना, तलछट।
2. द्वितीयक (Secondary) जैविक प्रक्रियाएँ (Biological)।
3. तृतीयक (Tertiary) जैविक, रासायनिक व भौतिक (पुनर्चक्रण हेतु)।

वायु प्रदूषण नियंत्रण

  • कारखानों में ऊँची चिमनियाँ
  • इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण (Filters)
  • स्क्रबर उपकरण
  • कोयले की जगह तेल/गैस का प्रयोग

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण

  • जनरेटरों में साइलेंसर
  • ऊर्जा सक्षम मशीनरी
  • ध्वनि अवशोषक सामग्री
  • कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण (Earplugs)

NTPC का पर्यावरण मॉडल

ISO 14001 (EMS) Certified

राष्ट्रीय ताप विद्युत्गृह कार्पोरेशन (NTPC) ने दिखाया है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

आधुनिकतम उपकरणों का उपयोग व उन्नयन (Upgradation)
अधिकतम राख का इस्तेमाल (Ash Utilization)
हरित क्षेत्र सुरक्षा और व्यापक वृक्षारोपण
राख-संग्रह (Ash pond) प्रबंधन
तरल अपशिष्ट प्रबंधन & जल पुनर्चक्रण
पारिस्थितिकीय मॉनीटरिंग (Online Database)
Exam Notes (Prevention)
  • Keywords: 8 गुना दूषित, सतत पोषणीय विकास, प्राथमिक/द्वितीयक/तृतीयक शोधन, इलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण।
  • Q. उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण कम करने के उपाय?
    -> जल पुनर्चक्रण, वर्षा जल संग्रहण, चिमनियों में फिल्टर, साइलेंसर का प्रयोग।

कक्षा 10 भूगोल – अध्याय 6: विनिर्माण उद्योग

स्रोत: NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित परीक्षा उपयोगी नोट्स।

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