राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ Lifelines of National Economy
परिवहन, संचार और व्यापार: एक-दूसरे के पूरक और देश के विकास के आधार।
परिवहन: अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा
Introduction & Importance
मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
मूल आवश्यकता: वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति उनके मांग वाले स्थानों (Demand Locales) तक अपने आप नहीं पहुँचती। दैनिक जीवन में प्रयुक्त विभिन्न सामग्रियों और सेवाओं को आपूर्ति स्थल (Supply Location) से माँग स्थल (Demand Location) तक ले जाने के लिए परिवहन की आवश्यकता होती है।
व्यापारी (Traders): वे व्यक्ति जो उत्पादों को परिवहन द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में संलग्न होते हैं, व्यापारी कहलाते हैं।
विकास की निर्भरता: किसी देश के विकास की गति वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के साथ-साथ उनके एक स्थान से दूसरे स्थान तक वहन (Movement) की सुविधा पर भी निर्भर करती है।
इसलिए, सक्षम परिवहन के साधन तीव्र विकास के लिए ‘पूर्व-अपेक्षित’ (Prerequisite) हैं।
संसार: एक ‘बड़ा गाँव’
आज परिवहन और संचार के सक्षम व तीव्र गति वाले साधनों के कारण दुनिया छोटी हो गई है और एक ‘बड़े गाँव’ (Global Village) में परिवर्तित हो गई है। दूरियाँ अब बाधा नहीं रहीं।
पूरकता सिद्धांत
परिवहन, संचार और व्यापार एक-दूसरे के पूरक (Complementary) हैं।
परिवहन के साधन (वर्गीकरण)
वस्तुओं और सेवाओं का लाना-ले जाना पृथ्वी के तीन महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर किया जाता है:
स्थल परिवहन
Land Transport: Road, Rail & Pipeline
A सड़क परिवहन (Roadways)
रेल की अपेक्षा सड़क परिवहन की महत्ता
| कारक (Factor) | लाभ/विवरण (Advantage) |
|---|---|
| 1. निर्माण लागत | रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है। |
| 2. भू-भाग अनुकूलता | अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़, विच्छिन्न भू-भागों और अधिक ढाल प्रवणता (पहाड़ी क्षेत्रों) पर सड़कें बनाई जा सकती हैं। |
| 3. सेवा & मितव्ययिता | यह घर-घर सेवा (Door-to-door) उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने-उतारने की लागत कम है। कम दूरी व कम वस्तुओं के लिए यह मितव्ययी है। |
| 4. योजक कड़ी | यह अन्य परिवहन साधनों (रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पत्तनों) के उपयोग में एक कड़ी (Feeder) के रूप में कार्य करता है। |
भारत में सड़कों का वर्गीकरण (6 वर्ग)
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग
Golden Quadrilateral Super Highways
यह भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी 6-लेन वाली महा राजमार्ग परियोजना है। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत के चार प्रमुख महानगरों (मेगासिटी) के बीच की दूरी और परिवहन समय को न्यूनतम करना है।
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स्वर्णिम चतुर्भुज (5,846 किमी): दिल्ली – कोलकाता – चेन्नई – मुंबई – दिल्ली को जोड़ता है।
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उत्तर-दक्षिण गलियारा (North-South Corridor): श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) से कन्याकुमारी (तमिलनाडु) तक।
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पूर्व-पश्चिम गलियारा (East-West Corridor): सिलचर (असम) से पोरबंदर (गुजरात) तक।
यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त नोडल एजेंसी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग
National Highways (NH)
ये देश के प्राथमिक सड़क तंत्र हैं जो देश के दूरस्थ भागों को आपस में जोड़ते हैं। यद्यपि ये कुल सड़क नेटवर्क का लगभग 2% ही हैं, लेकिन ये कुल सड़क यातायात का लगभग 40% भार वहन करते हैं।
- कुल लंबाई: लगभग 1,46,145 किमी (दिसंबर 2023 तक)।
- सबसे लंबा राजमार्ग (NH-44): श्रीनगर से कन्याकुमारी (3,745 किमी)।
- दूसरा सबसे लंबा (NH-27): पोरबंदर से सिलचर।
- ऐतिहासिक महत्व: शेरशाह सूरी मार्ग को अब राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 (NH-1) (दिल्ली से अमृतसर) के नाम से जाना जाता है।
राज्य राजमार्ग (State Highways)
राज्यों की राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें राज्य राजमार्ग कहलाती हैं। ये राज्यों के भीतर परिवहन, व्यापार और संपर्क की मुख्य धमनियां हैं और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ी होती हैं।
राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में PWD इन सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है।
जिला मार्ग (District Roads)
ये सड़कें जिले के विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों (जैसे तालुका मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय) को जिला मुख्यालय से जोड़ती हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों को बाजारों और शहरी केंद्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इन सड़कों के रखरखाव और प्रबंधन का उत्तरदायित्व जिला परिषद का होता है।
अन्य सड़कें (Other/Rural Roads)
ये वे सड़कें हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं। भारत में सड़कों की कुल लंबाई में इनका हिस्सा सर्वाधिक (लगभग 80%) है।
- शुभारंभ: 2000 (केंद्र प्रायोजित योजना)।
- प्रावधान: देश के प्रत्येक गाँव को प्रमुख शहरों से पक्की सड़कों (वे सड़कें जिन पर वर्ष भर वाहन चल सकें) द्वारा जोड़ना।
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लक्ष्य (जनसंख्या आधार):मैदानी: 500+ पहाड़ी/दुर्गम: 250+
- प्रभाव: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर में व्यापक सुधार।
सीमांत सड़कें (Border Roads)
ये सड़कें देश के उत्तर तथा उत्तरी-पूर्वी सीमांत क्षेत्रों में स्थित हैं। इनका सामरिक महत्त्व (Strategic Importance) अत्यधिक है क्योंकि ये रक्षा तैयारियों और सीमा सुरक्षा में मदद करती हैं।
सड़क घनत्व (Road Density)
परिभाषा: प्रति 100 वर्ग किमी क्षेत्र में सड़कों की लंबाई।
- समानता: असमान वितरण
- न्यूनतम (J&K): ~12.14 किमी
- अधिकतम (केरल): ~517.77 किमी
- राष्ट्रीय औसत (2011): 142.68 किमी
सड़क परिवहन की समस्याएँ
- यातायात व यात्रियों की संख्या के अनुपात में सड़कों का जाल अपर्याप्त है।
- लगभग आधी सड़कें कच्ची हैं जो वर्षा ऋतु में अनुपयोगी हो जाती हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्ग भी अपर्याप्त हैं।
- शहरों में सड़कें अत्यंत तंग व भीड़-भाड़ वाली हैं।
- पुल व पुलिया (Culverts) पुराने तथा संकरे हैं।
रेल परिवहन (Railways)
Lifeline of the Nation
भारतीय रेल देश की प्रमुख जीवन रेखा है। यह वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन का मुख्य साधन है। पिछले 170 वर्षों से भी अधिक समय से, यह कृषि, उद्योग और व्यापार के त्वरित विकास के लिए एक एकीकृत शक्ति (Integrating Force) के रूप में कार्य कर रही है।
रेल जाल के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
- •विस्तृत समतल भूमि (निर्माण में आसानी)।
- •सघन जनसंख्या घनत्व (अधिक यात्री)।
- •संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधन।
- •ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्र।
- •पहाड़ियों में सुरंगों (Tunnels) की आवश्यकता।
- •उदाहरण: कोंकण रेलवे (पश्चिमी घाट)।
- •हिमालय: अत्यधिक उच्चावच, विरल जनसंख्या।
- •प. राजस्थान: बालू के टीले।
- •गुजरात: दलदली भाग।
- बिना टिकट यात्रा।
- रेल संपत्ति की हानि और चोरी।
- अनावश्यक जंजीर खींचना (समय की बर्बादी)।
- पटरियों का पुराना होना (Old Tracks)।
- वंदे भारत: स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें।
- कवच (Kavach): स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली।
- DFC: समर्पित माल ढुलाई गलियारे।
- लक्ष्य 2030: नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक।
C पाइपलाइन (Pipeline)
नवीनतम परिवहन साधनपहले इसका उपयोग शहरों और उद्योगों में केवल पानी पहुँचाने के लिए होता था। आज इसका प्रयोग कच्चा तेल, पेट्रोल उत्पाद तथा प्राकृतिक गैस को शोधनशालाओं (Refineries), उर्वरक कारखानों और बड़े ताप विद्युत गृहों तक पहुँचाने में किया जाता है।
नोट: ठोस पदार्थों को तरल अवस्था (Slurry) में बदलकर पाइपलाइन द्वारा ले जाया जाता है।
- संचालन लागत (Running Cost): अत्यंत कम (Minimal)।
- निरंतरता: वाहनांतरण देरी (Trans-shipment losses) और देरी को पूरी तरह समाप्त करता है।
- स्थानिक उपयोगिता: बरौनी, मथुरा, पानीपत जैसी अंतर्देशीय (inland) शोधनशालाएँ पाइपलाइन के कारण ही संभव हो पाई हैं।
- प्रारंभिक लागत: बिछाने की प्रारंभिक लागत (Initial Cost) बहुत अधिक होती है।
- रिसाव: लीकेज का पता लगाना कठिन होता है।
- लचीलापन: एक बार बिछाने के बाद क्षमता बढ़ाना/घटाना मुश्किल है।
परिवहन के 3 प्रमुख जाल (Networks)
शाखाएँ: बरौनी से हल्दिया (via राजबंध), राजबंध से मौरीग्राम तक।
शाखाएँ: कोयली (वडोदरा के निकट) को चक्षु व अन्य स्थानों से जोड़ती है।
महत्त्व: यह भारत की पहली क्रॉस-कंट्री गैस पाइपलाइन है। यह कोटा (राजस्थान), शाहजहांपुर, बबराला (UP) के उर्वरक संयन्त्रों को गैस पहुँचाती है।
जल परिवहन
Waterways & Ports
विदेशी व्यापार में भागीदारी (समुद्र द्वारा): 95% (मात्रा), 68% (मूल्य)।
राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways)
- NW-1 (1620 km) गंगा नदी: हल्दिया इलाहाबाद
- NW-2 (891 km) ब्रह्मपुत्र नदी: सदिया धुबरी
- NW-3 (205 km) केरल: पश्चिम-तटीय नहर (कोट्टाग्राम – कोल्लम)
- NW-4 (1078 km): गोदावरी-कृष्णा & पुदुच्चेरी नहर।
- NW-5 (588 km): ब्राह्मणी नदी, महानदी डेल्टा।
प्रमुख समुद्री पत्तन (12 Major Ports)
- कांडला (दीनदयाल): ज्वारीय पत्तन (Tidal), स्वतंत्रता बाद पहला।
- मुंबई: वृहत्तम, प्राकृतिक पोताश्रय।
- J.N. पत्तन: मुंबई का भार कम करने हेतु।
- मारमागाओ (गोवा): 50% लौह अयस्क निर्यात।
- न्यू-मंगलौर: कुद्रेमुख लौह अयस्क।
- कोची: लैगून के मुहाने पर प्राकृतिक पोताश्रय।
- तूतीकोरिन: प्राकृतिक, समृद्ध पृष्ठभूमि।
- चेन्नई: प्राचीनतम कृत्रिम पत्तन।
- विशाखापत्तनम: सबसे गहरा, स्थल-रुद्ध (Landlocked), सुरक्षित।
- पारादीप: लौह अयस्क निर्यात।
- कोलकाता: अंतः स्थलीय नदीय (Riverine) पत्तन। ज्वारीय।
- हल्दिया: सहायक पत्तन।
राजस्थान में राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways in Rajasthan)
राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत राजस्थान की प्रमुख नहरों और नदियों को भी राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है (मुख्यतः विकासशील चरण में):
वायु परिवहन
Fastest & Prestigious
यह परिवहन का तीव्रतम, आरामदायक व प्रतिष्ठित साधन है। इसके द्वारा अति दुर्गम स्थानों जैसे—ऊँचे पर्वत, मरुस्थल, घने जंगल व लंबे समुद्री रास्तों को सुगमता से पार किया जा सकता है।
महत्व: प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप) के समय राहत कार्यों में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) किया गया।
- सबसे तेज परिवहन साधन।
- भौतिक बाधाओं (पहाड़, नदी) से मुक्त।
- रणनीतिक (Strategic) महत्व।
- अत्यधिक खर्चीला साधन।
- आम आदमी की पहुँच से बाहर।
- खराब मौसम में उड़ान भरना मुश्किल।
उत्तरी-पूर्वी राज्य (विशेष महत्त्व)
बड़ी नदियाँ, विच्छिन्न धरातल, घने जंगल, निरंतर बाढ़ और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के कारण यहाँ सड़क/रेल बनाना कठिन है।
विशेष प्रावधान: इन राज्यों में हवाई यात्रा को सुलभ बनाने के लिए विशेष छूट दी जाती है।
पवन हंस हेलीकॉप्टर लिमिटेड
- ONGC को तेल और प्राकृतिक गैस आयोग की अपतटीय संक्रियाओं में सेवा।
- अगम्य व दुर्गम भू-भागों (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड) में सेवा।
आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा को किफायती बनाना और क्षेत्रीय मार्गों पर कनेक्टिविटी बढ़ाना।
संचार सेवाएँ
यह विश्व का वृहत्तम नेटवर्क है। यह पार्सल और व्यक्तिगत पत्र व्यवहार दोनों को संभालता है।
भारत का दूरसंचार तंत्र एशिया महाद्वीप में अग्रणी है। नगरीय क्षेत्रों के अतिरिक्त भारत के दो-तिहाई से अधिक गाँव एस.टी.डी. (STD) दूरभाष सेवा से जुड़े हुए हैं।
- सूचनाओं के प्रसार को बढ़ाने के लिए प्रत्येक गाँव में 24 घंटे STD सुविधा।
- यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और संचार प्रौद्योगिकी के समन्वय से संभव हुआ है।
मनोरंजन के साथ-साथ जागरूकता पैदा करना।
- आकाशवाणी (AIR): राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय भाषाओं में कार्यक्रम।
- दूरदर्शन (TV): राष्ट्रीय प्रसारक (National Broadcaster)।
- समाचार-पत्र: 100+ भाषाओं में (हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू सर्वाधिक)।
- चलचित्र (Cinema): भारत सर्वाधिक फिल्में बनाता है। प्रमाणन: CBFC।
ज्ञान आधारित परिवर्तन हेतु कार्यक्रम।
लक्ष्य: IT (भारतीय प्रतिभा) + IT (सूचना प्रौद्योगिकी) = IT (कल का भारत)।
व्यापार & पर्यटन
दो देशों के मध्य वस्तुओं का आदान-प्रदान। यह देश का ‘आर्थिक बैरोमीटर’ है।
- अनुकूल (Favorable): निर्यात मूल्य > आयात मूल्य।
- असंतुलित (Unfavorable): आयात मूल्य > निर्यात मूल्य।
भारत ‘सॉफ्टवेयर महाशक्ति’ के रूप में उभरा है (सॉफ्टवेयर निर्यात से भारी विदेशी मुद्रा अर्जन)।
150 लाख+ लोग प्रत्यक्ष रूप से संलग्न।
- राष्ट्रीय एकता (National Integration) को बढ़ावा।
- स्थानीय हस्तकला और सांस्कृतिक उद्यमों को समर्थन।
- अंतर्राष्ट्रीय समझ (International Understanding) का विकास।
- विदेशी मुद्रा की प्राप्ति।
परीक्षा उपयोगी नोट्स (Exam Corner)
स्वर्णिम चतुर्भुज, NHAI, BRO (1960), अटल टनल, बड़ी लाइन (1.676m), कोंकण रेलवे, पाइपलाइन (स्लरी), HVJ, ज्वारीय पत्तन (कांडला/कोलकाता), पवन हंस, व्यापार संतुलन, सॉफ्टवेयर महाशक्ति, NW-1 (हल्दिया-इलाहाबाद), NW-2 (सदिया-धुबरी), प्रथम श्रेणी डाक।
- Q. रेल परिवहन उत्तरी मैदानों में अधिक क्यों है? A. विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों के कारण।
- Q. सीमांत सड़कों का महत्त्व बताएँ? A. ये सामरिक महत्त्व की सड़कें हैं जो दुर्गम उत्तरी/उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में अभिगम्यता (accessibility) और आर्थिक विकास बढ़ाती हैं। (उदा: अटल टनल)।
- Q. पाइपलाइन परिवहन के लाभ? A. बिछाने की लागत अधिक है, लेकिन चलाने की लागत न्यूनतम है। इसमें वाहनांतरण देरी (Trans-shipment losses) नहीं होती।
- Q. पूर्वी तट का सबसे गहरा और सुरक्षित पत्तन? A. विशाखापत्तनम।
- Q. व्यापार संतुलन क्या है? A. आयात और निर्यात के मूल्य का अंतर। यदि निर्यात > आयात, तो यह ‘अनुकूल’ (Favorable) होता है।
- Q. प्रथम और द्वितीय श्रेणी की डाक में क्या अंतर है? A. प्रथम श्रेणी (कार्ड/लिफाफे) हवाई मार्ग से भेजे जाते हैं, जबकि द्वितीय श्रेणी (पैकेट/अखबार) स्थल/जल मार्ग से भेजे जाते हैं।